Tuesday, February 19, 2019

बॉलीवुड गाने पर छात्रों के डांस करने पर पाकिस्तान के इस स्कूल का Registration रद्द

बॉलीवुड गाने पर छात्रों के डांस करने पर पाकिस्तान के इस स्कूल का Registration रद्द
पाकिस्तान के शहर कराची के एक स्कूल का रजिस्ट्रेशन छात्रों के बॉलीवुड गाने पर डांस करने के बाद निलंबित कर दिया गया. इतना ही नहीं स्कूल के समारोह में मंच पर डिस्प्ले स्क्रीन (Display Screen) पर भारतीय तिरंगे को भी प्रदर्शित किया गया था. न्यूज़18 की खबर के अनुसार निजी संस्थानों के निरीक्षण/रजिस्ट्रेशन निदेशालय, सिंध के अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर इस वीडियो को देखा. इस वीडियो में कराची के मामा बेबी केयर स्कूल के छात्रों को बॉलीवुड गाने-फिर भी दिल है हिंदुस्तानी, की धुन पर नाचते हुए देखा गया है. इस फिल्म में बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता शाहरुख खान मौजूद है. इस डांस परफॉरमेंस में बच्चों के पीछे स्क्रीन पर एक लहराते भारतीय ध्वज के ग्राफिक्स का उपयोग किया गया था. न्यूज़18 ने विशेष रूप से उस पत्र को प्राप्त किया है जिसे निदेशालय ने स्कूल अधिकारियों को भेजा था और उन्हें अपने निर्णय की सूचना दी थी. अधिकारियों के अनुसार यह डांस परफॉमेंस अत्यधिक आपत्तिजनक था और राष्ट्रीय गरिमा के खिलाफ था. इस पत्र में स्पष्ट रूप से संकेत दिया गया है कि इस तरह के कार्यों को बिल्कुल सहन नहीं किया जाएगा. पत्र में आगे कहा गया है कि स्कूल के अधिकारियों को निदेशालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना चाहिए. स्कूल प्रशासन ने पत्र का कोई जवाब नहीं दिया जिसके बाद संबंधित अधिकारियों ने स्कूल की सभी शाखाओं के रजिस्ट्रेशन को निलंबित कर दिया.

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Pulwama Attack: सऊदी के Crown Prince ने एक दिन के लिए टाली पाकिस्तान यात्रा

Pulwama Attack: सऊदी के Crown Prince ने एक दिन के लिए टाली पाकिस्तान यात्रा
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत के सख्त रवैये को देखते हुए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (Mohammed Bin Salman) की पाकिस्तान यात्रा एक दिन के लिए टल गई है. न्यूज़ एजेंसी एएनआई के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि सऊदी क्राउन प्रिंस रविवार यानी 17 फरवरी को इस्लामाबाद पहुंचेंगे. सऊदी क्राउन प्रिंस पहले आज यानी शनिवार को पाकिस्तान जाने वाले थे, लेकिन उन्होंने अपना दौरा एक दिन के लिए रद्द कर दिया है. माना जा रहा है कि पुलवामा हमले को देखते हुए मोहम्मद बिन सलमान ने एक दिन के लिए पाकिस्तान का दौरा टाला है. प्रिंस सलमान की यात्रा में देरी क्यों हुई, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इसकी वजह की जानकारी नहीं दी है. डॉन अखबार के मुताबिक दोनों देशों के बीच बाकी द्विपक्षीय मुलाकात पहले के जैसे ही बरकरार हैं. [caption id="attachment_192636" align="alignnone" width="1002"] सऊदी अरब का क्राउन प्रिंस बनने के बाद मोहम्मद बिन सलमान पहली बार पाकिस्तान की यात्रा पर जा रहे हैं[/caption] मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान में प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की यात्रा को देखते हुए काफी तैयारी की गई है. उनके और उनके स्टाफ के लिए राजधानी इस्लामाबाद के होटलों के लगभग 750 कमरे बुक कराए गए हैं. इसके अलावा शहर में प्रिंस सलमान के बड़े-बड़े कटआउट और पोस्टर भी लगाए गए हैं. बता दें कि सऊदी अरब ने गहरे आर्थिक संकट से घिरे पाकिस्तान को पिछले महीने (जनवरी) तीन अरब अमेरिकी डॉलर की मदद का भरोसा दिया था. इसमें पाकिस्तान को तेल आपूर्ति का भुगतान चुकाने के लिए तीन साल का समय दिया जाना भी शामिल है. पाकिस्तान यात्रा के बाद प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान 19 फरवरी से दो दिन की भारत दौरे पर आएंगे. यह उनका पहला भारत दौरा होगा.

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आतंकवादियों को समर्थन और पनाह देना तुरंत बंद करे पाकिस्तान: अमेरिका

आतंकवादियों को समर्थन और पनाह देना तुरंत बंद करे पाकिस्तान: अमेरिका
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में CRPF के काफिले पर हमले में कम से कम 40 जवानों के शहीद होने की घटना की कड़ी निंदा करते हुए अमेरिका ने पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया है और कहा है कि वह सभी आतंकवादी समूहों को समर्थन और पनाह देना तुरंत बंद करे. पाकिस्तान से गतिविधियां चलाने वाले आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने पुलवामा में गुरूवार को हुए फिदाई हमले की जिम्मेदारी ली है. इस हमले में CRPF के कम से कम 40 जवान शहीद हुए हैं और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने गुरुवार देर रात जारी एक बयान में कहा, ‘अमेरिका, पाकिस्तान से अपील करता है कि वह अपनी जमीन से आतंकी गतिविधियां चलाने वाले ऐसे सभी आतंकवादी संगठनों को समर्थन और पनाह देना तुरंत बंद करे, जिनका एकमात्र लक्ष्य क्षेत्र में अव्यवस्था, हिंसा और आतंक फैलाना है.’ उन्होंने कहा,‘‘यह हमला आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका और भारत के सहयोग एवं साझेदारी को और बढ़ाने के हमारे संकल्प को और मजबूत बनाता है.’ ये भी पढ़ें: Pulwama Attack: जिन्हें आतंकी भटके हुए बच्चे लगते हैं, उन्हें गोली मारकर हो बदले की शुरुआत- योगेश्वर दत्त सैंडर्स ने कहा कि अमेरिका पुलवामा हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रेस सचिव ने कहा, ‘इस जघन्य हमले में जान के नुकसान के लिए हम पीड़ितों के परिजन, भारत सरकार और भारतीय लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट करते हैं.’ इससे पहले, अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा कि वह आतंकवाद के हर रूप से मुकाबले में भारत सरकार के साथ मिल कर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. विदेश विभाग के उप-प्रवक्ता रॉबर्ट पालाडीनो ने कहा, ‘अमेरिका भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर में भारतीय केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर आज हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता है.’ उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस जघन्य कृत्य की जिम्मेदारी ली है. हम सभी देशों से अपील करते हैं कि वह आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने और समर्थन मुहैया नहीं कराने से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के संदर्भ में अपनी जिम्मेदारियों को निभाए.’ अमेरिका के कई सांसदों ने भी जघन्य आतंकवादी हमले को लेकर भारत के साथ एकजुटता प्रदर्शित की और कहा कि आतंकवाद की निंदा और उसे मात देने के लिए दोनों देश एकजुट हैं. पार्टी लाइन से परे जाकर 50 से ज्यादा कांग्रेस सदस्यों और सीनेटरों ने सोशल मीडिया पर भारत के लोगों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित की है और जैश-ए-मोहम्मद एवं इसे प्रायोजित करने वाले सरकारी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान किया है. ये भी पढ़ें: कश्मीर में हमला: आतंकियों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल की इजाजत क्यों?

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भारत के MFN दर्जा वापस लेने पर पाकिस्तान ने कहा, हम कोई 'भावनात्मक फैसला' नहीं लेंगे

भारत के MFN दर्जा वापस लेने पर पाकिस्तान ने कहा, हम कोई 'भावनात्मक फैसला' नहीं लेंगे
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान से सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा वापस लेने पर पाकिस्तान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि वह कोई भी 'भावनात्मक फैसला' नहीं करेगा. विचार-विमर्श के बाद ही कोई प्रतिक्रिया देगा. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान से व्यापार में 'सबसे तरजीही राष्ट्र (एमएफएन)' का दर्जा वापस ले लिया है. गुरुवार को हुए इस हमले में कम- से-कम 40 जवान शहीद हुए हैं. पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली है. पाकिस्तान प्रधानमंत्री के व्यापार सलाहकार अब्दुल रज्जाक दाऊद ने संवाददाताओं से कहा कि भारत के फैसले पर कोई भी प्रतिक्रिया विचार-विमर्श के बाद किया जाएगा. भारत के इस फैसले का पाकिस्तान पर बहुत थोड़ा असर होगा  उन्होंने कहा, 'भारत ने पाकिस्तान को एमएफएन देशों की सूची से बाहर कर दिया है लेकिन हम कोई भी भावनात्मक फैसला नहीं लेंगे और सोच-विचार करने के बाद ही प्रतिक्रिया जारी करेंगे. तरजीही राष्ट्र का दर्जा वापस लेने के बाद पाकिस्तान से भारत को निर्यात की जाने वाली 48.8 करोड़ डॉलर (करीब 3,482.3 करोड़ रुपए) की वस्तुओं पर प्रभाव पड़ेगा. पाकिस्तान ने 2017-18 में भारत को 48.8 करोड़ डॉलर का सामान निर्यात किया था. वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से कहा कि भारत के इस फैसले का पाकिस्तान पर बहुत थोड़ा असर होगा क्योंकि दोनों देशों के बीच का व्यापार बहुत कम है.अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान को धन के लिहाज से बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होगा.

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Google प्ले स्टोर पत्नियों और बेटियों की जासूसी करवाने वाला ऐप क्यों नहीं हटा रहा?

Google प्ले स्टोर पत्नियों और बेटियों की जासूसी करवाने वाला ऐप क्यों नहीं हटा रहा?
गूगल प्ले-स्टोर पर लाखों ऐप्स मौजूद हैं, लेकिन सऊदी सरकार का यह ऐप अभी कई हाई-प्रोफाइल लोगों के निशाने पर है. ट्विटर पर लोग #DropTheAPP लिखकर इस ऐप को गुलामी का टूल बता रहे हैं. अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता काकस वाइस चेयर कैथरीन क्लार्क ने भी ट्वीट करते हुए इस ऐप को पितृसत्तात्मक हथियार बताया है. साथ ही #Apple और #Google को टैग करते हुए इस खतरनाक ऐप की सुविधा को बंद करने की बात कही है. Absher is a patriarchal weapon: it allows Saudi men to track women, restrict their travel, and enable human rights violations. #Apple and #Google must stop facilitating this dangerous tool of control. https://t.co/5pLzKlLrKk — Katherine Clark (@RepKClark) February 13, 2019 बिजनेस इनसाइडर के अनुसार रिपब्लिक पार्टी की नेता कैरोलीन मलोनी ने भी कैथरीन क्लार्क की बातों को समर्थन देते हुए #DropTheAPP से ट्वीट किया है. मंगलवार को अमेरिकी सीनेटर रॉन विडेन ने ऐपल के सीईओ टिम कुक और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को पत्र लिखकर मांग की कि वे ऐप स्टोर और Google Play से इस ऐप को तुरंत हटा दें. आखिर इस ऐप का क्यों हो रहा है विरोध? ऐप का नाम है- एब्शर( Absher). यह ऐप सऊदी के पुरुषों को यह अनुमति देता है कि वह अपनी पत्नियों और बेटियों की जासूसी कर सकें. इस ऐप के जरिए घर के पुरूष यह पता लगाते हैं कि उनके घर कि महिला कहां हैं. महिलाएं अगर एयरपोर्ट पर अपने पासपोर्ट का इस्तेमाल करती हैं, तो उसकी जानकारी तक उनके पति के मोबाइल में पहुंच जाती है. एक तरह से यह महिलाओं को ट्रैक, उनकी यात्रा को प्रतिबंधित और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ताज्जुब की बात यहां ये है कि इसे बनवाने वाली कोई और नहीं, सऊदी सरकार है. Google/Apple के ऐप स्टोर पर उपलब्ध यह ऐप सऊदी अरब को अपने गार्जियनशिप लॉ को लागू करने में मदद करता है. गार्जियनशिप लॉ महिलाओं को पुरुष अभिभावक की अनुमति के बिना यात्रा करने की अनुमति नहीं देता है. गूगल और ऐपल को क्यों घसीट रहे हैं लोग? क्योंकि ऐपल के ऐप स्टोर और गूगल के प्लेस्टोर में यह ऐप मौजूद है. दुनियाभर की कई महत्वपूर्ण संस्थाएं जैसे ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल, महिला अधिकारों की एक्टिविस्ट यासमीन मोहम्मद ने गूगल और ऐपल को पत्र लिखकर इस ऐप को हटाने की मांग की है. यूएस की सीनेटर रॉन विडेन ने गूगल और ऐपल के सीईओ टिम कुक और सुंदर पिचाई को पत्र लिखकर कहा, 'अमेरिकी कंपनियों को सऊदी सरकार की पितृसत्ता को सक्षम या सुविधाजनक नहीं बनाना चाहिए, उन्होंने महिलाओं पर नियंत्रण की सऊदी प्रणाली को अपमानजनक बताया और इसे जल्द से जल्द हटाने की मांग की. वहीं ह्यूमन राइट्स वॉच के लिए मध्य पूर्व शोधकर्ता रोथना बेगना ने कहा कि इस तरह के ऐप महिलाओं के खिलाफ भेदभाव सहित मानवाधिकारों के हनन की सुविधा देते हैं. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने तो यहां तक कह दिया कि यह ऐप महिलाओं की आजादी को खतरे में डाल रहा है, इसलिए गूगल और ऐपल इसे अपने प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाएं. इन शिकायतों का जवाब देते हुए कुक ने कहा कि वे गंभीरता के साथ इसका हल निकालेंगे.अंतरराष्ट्रीय कानून निर्माताओं, समूह, एक्टिविस्ट के दबाव में गूगल ऐप की जांच के लिए तैयार हो गया है. गूगल यह निर्धारित करने के लिए ऐप की समीक्षा करेगा कि यह उसकी नीतियों के अनुरूप है या नहीं. इस जांच में ऐपल भी शामिल है.

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EU ने पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में डाला, आतंकियों की फाइनेंसिंग रोकने के लिए उठाया कदम

EU ने पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में डाला, आतंकियों की फाइनेंसिंग रोकने के लिए उठाया कदम
यूरोपीय यूनियन से पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है. न्यूज18 के मुताबिक यूरोपियन कमीशन ने सऊदी अरब, पनामा और 4 अमेरिकी टेरिटरी को डर्टी-मनी ब्लैकलिस्ट नेशंस की सूची में डाल दिया है. ईयू एग्जीक्यूटिव का कहना है कि यह फैसला इसलिए किया गया है जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकियों की फाइनेंसिंग को रोका जा सके. ईयू के इस फैसले पर कई देशों ने विरोध भी जताया है. अब इस मामले पर ब्रिटेन को इस बात की चिंता है कि सूची में शामिल लोगों के साथ इकोनॉमिक रिश्तों का क्या होगा. वहीं पनामा ने कहा कि उसे इस सूची से बाहर किया जाना चाहिए क्योंकि उसने मनी लॉन्ड्रिंग के मसले पर गंभीर कदम उठाए हैं. ईयू की इस डर्टी लिस्ट में दक्षिण कोरिया, अफगानिस्तान, ईरान, इथियोपिया, पाकिस्तान, सीरिया, श्रीलंका, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, यमन और ट्यूनीशिया भी शुमार है. इसके अलावा बोत्सवाना, लीबिया, बहामास और घाना भी इसमें शामिल हैं. इस लिस्ट में शामिल देशों के लिए यह नियम हैं कि यूरोपीय देश इनके साथ बिजनेस नहीं कर सकते और इन पर सख्त कदम उठाते हैं. ईयू के कदम से पाकिस्तानी नागरिकों को व्यापार में काफी परेशानी होगी. विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तानी व्यापारियों को आसानी से लोन भी नहीं मिलेगा. हालांकि यह लिस्ट अभी पास नहीं हुई है क्योंकि ईयू कमिश्नर ने इसे अभी प्रस्तावित किया है. यह मेजॉरिटी वोट से रिजेक्ट भी की जा सकती है. इसके लिए उनके पास 2 महीने का समय है. यूएस ट्रेजरी ने इस लिस्ट के प्रोसेस पर नाराजगी जताई है और इसे गलत बताया है. ये भी पढ़ें: Pulwama Attack: काफिले में शामिल CRPF के जवान की जुबानी हमले का आंखों-देखा हाल ये भी पढ़ें: घाटी को दोबारा जन्नत बनाने के लिए पाकिस्तान की 'सर्जरी' के साथ अलगाववादियों का भी 'इलाज' जरूरी

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आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई में भारत को सऊदी अरब का समर्थन किया

आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई में भारत को सऊदी अरब का समर्थन किया
सऊदी अरब ने शुक्रवार को कहा कि वह आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ भारत की लड़ाई में उसके साथ खड़ा है. उसने जम्मू कश्मीर के पुलवामा में पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए- मोहम्मद के आत्मघाती हमले को ‘कायराना’ कृत्य करार दिया. सऊदी अरब की यह कड़ी भर्त्सना ऐसे समय आयी है जब सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मन बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज अल साद शीर्ष भारतीय नेतृत्व के साथ अगले हफ्ते बातचीत करने के लिए भारत की राजकीय यात्रा पर आने वाले हैं. पुलवामा में जैश ए मोहम्मद के आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के कम से कम 40 जवान शहीद हो गए. ये भी पढ़ें: तस्वीरों में देखिए जब पुलवामा आतंकी हमले के बाद जम्मू में बिगड़े हालात इस आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हुए सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अर्धसैनिक काफिले को निशाना बनाकर किए गए इस विस्फोट की वह निंदा करता है. सरकारी संवाद समिति सऊदी प्रेस एजेंसी ने विदेश मंत्रालय के सूत्र के हवाले से कहा कि सऊदी अरब इन कायरना आतंकवादी कृत्यों को खारिज करता है और वह आतंकवाद एवं चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई में ‘मित्र भारत गणतंत्र’ के साथ खड़ा है. सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार सऊदी अरब ने इस हमले में शहीद हुए जवानों के परिवारों, घायल हुए जवानों, भारत सरकार एवं भारत की जनता के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. ये भी पढ़ें: पुलवामा हमला: जम्मू में तोड़-फोड़, सांप्रदायिक हिंसा की आशंका के चलते लगा कर्फ्यू पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ बातचीत के लिए शनिवार को इस्लामाबाद पहुंच रहे शहजादे मंगलवार को भारत की दो दिवसीय यात्रा पर नयी दिल्ली पहुंचेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भारत आने का न्यौता दिया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली में कहा था, ‘जिन विषयों पर चर्चा होगी, वे निवेश, रक्षा, सुरक्षा, आतंकवाद के विरूद्ध अभियान, और नवीकरणीय ऊर्जा हैं.’ ये भी पढ़ें: Pulwama Attack: काफिले में शामिल CRPF के जवान की जुबानी हमले का आंखों-देखा हाल

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Monday, February 18, 2019

यह चिड़ियाघर दे रहा है शेरनी के साथ खेलने का मौका

यह चिड़ियाघर दे रहा है शेरनी के साथ खेलने का मौका
चिड़ियाघर में बच्चों को सबसे ज्यादा मज़ा बंदरों को देखकर आता है. और अगर डर की बात करें तो सबसे ज्यादा डर शेर से लगता है. लिहाजा इन जानवरों के बड़े बड़े पिजरों में कैद रखा जाता है. लेकिन गाजा के युद्धग्रस्त फिलिस्तीनी एनक्लेव के एक चिड़ियाघर ने यह फासला कम करने की कोशिश की है. यह चिड़ियाघर यहां आने वाले लोगों को 14 महीने की शेरनी 'फालेस्टाइन' के साथ खेलने का मौका दे रहा है. वैसे तो फालेस्टाइन के पंजे उखाड़ कर हटा दिया गया है लेकिन दांत अभी भी हैं. माना जा रहा है कि 14 महीने की यह शेरनी बाहरी लोगों से मिलने के लिए तैयार है. फालेस्टाइन को दक्षिणी गाजा पट्टी के राफा पार्क में रखा गया है. पार्क के मालिक 53 वर्षीय मोहम्मद जुमा ने कहा, 'मैं शेरनी की आक्रामकता को कम करने की कोशिश कर रहा हूं ताकि यह बाहरी लोगों के साथ अनुकूल हो सके.'  व्यवसायिक मुनाफे के लिए जानवरों के साथ ऐसा करना आम एनडीटीवी के अनुसार गाजा में व्यवसायिक मुनाफे के लिए जानवरों के साथ ऐसा करना आम है. यहां कुछ चिड़ियाघर व्यवसाय प्रतिस्पर्धा के लिए ऐसा करते हैं. दो हफ्ते पहले फालेस्टाइन पर काम करने वाले पशु चिकित्सक फैयज अल-हदद ने उसके हाव-बाव और व्यवहार को अच्छे से नोटिस किया, क्योंकि उसे बच्चों सहित स्थानीय निवासियों के पास रहने के लिए अपने पिंजरे से बाहर ले जाया गया था. उसके पंजों को काट दिया गया है, ताकि वो जल्द बढ़ ना सकें और यहां पहुंचने वाले बच्चे-बड़े सभी उसके साथ खेल सकें. गाजा में जानवरों के लिए कोई स्पेशल हॉस्पिटल नहीं है, इसलिए फालेस्टाइन का ऑपरेशन तमाम सुविधाओं के अभाव में चिड़ियाघर में ही किया गया. हालांकि हद्दद ने इस बात से इनकार किया है कि यह घटना जानवर के साथ क्रूरता की है. हद्दद ने कहा, 'हम पार्क में आ रहे लोगों की संख्या में वृद्धि के साथ ही बच्चों के चेहरे पर मुस्कुराहट और खुशी लाना चाहते हैं.' इसके साथ ही हद्दद ने चेतावनी दी कि शेर के पंजे छह महीने के भीतर वापस बढ़ जाते हैं. ऐसे में शेर अपनी आक्रामक प्रवृत्ति को नहीं छोड़ेता. लेकिन पौ प्रोजेक्ट नाम के एनजीओ जो बड़ी बिल्लियों का पुनर्वास करती है, का कहना है कि यह घटना पूरी तरह से अमानवीय है.

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Sunday, February 17, 2019

हमारे पास सिखों का मक्का-मदीना करतारपुर साहिब है: इमरान खान

हमारे पास सिखों का मक्का-मदीना करतारपुर साहिब है: इमरान खान
प्रधान मंत्री इमरान खान ने कहा है कि पाकिस्तान में सिखों का मक्का और मदीना है और देश अल्पसंख्यक समुदाय के लिए उन साइटों को खोल रहा है. पिछले साल नवंबर में इमरान खान ने पाकिस्तान के करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब से भारत के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक मंदिर में भारतीय सिख तीर्थयात्रियों के वीजा मुक्त आवागमन की सुविधा के लिए गलियारे की आधारशिला रखी थी. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री एक दिवसीय यात्रा पर यूएई में थे. वहां वो UAE के उपराष्ट्रपति और प्रधान मंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल-मकतूम के निमंत्रण पर विश्व सरकार शिखर सम्मेलन के 7 वें संस्करण में भाग लेने के लिए गए थे. एनडीटीवी के मुताबिक खान ने रविवार को कहा, 'हमारे पास सिखों का मक्का और मदीना है. और हम सिर्फ सिखों के लिए उन साइटों को खोल रहे हैं.' मक्का और मदीना इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थल हैं. प्रधान मंत्री ने कहा, 'हमने अपना वीजा के लिए रास्ते खोल दिए हैं. पाकिस्तान में पहली बार, 70 देश हैं, जहां से लोग आकर हवाई अड्डे पर वीजा प्राप्त कर सकते हैं.' खान ने कहा कि पाकिस्तान में सबसे अच्छी पर्यटक क्षमता है, भले ही इस समय शायद ही कोई पर्यटन स्थल हमारे यहां हो. उन्होंने कहा, 'आधी दुनिया की सबसे ज्यादा ऊंची चोटियां पाकिस्तान में हैं.' उन्होंने कहा कि देश में 1,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा है. खान ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में सबसे पुराने ऐतिहासिक स्मारक हैं, शायद दुनिया में किसी भी जगह जितने पुराने. 'हमारे पास सिंधु घाटी सभ्यता है, जो 5,000 साल पुरानी है. हमारे पास 2500 साल पुराना पेशावर शहर है. लाहौर और मुल्तान प्राचीन शहर हैं. उन्होंने यह भी कहा कि 'हमारे पास गांधार सभ्यता है, जो इस्लामाबाद के उत्तर में, बौद्ध सभ्यता का उद्गम स्थल था. सबसे बड़ा स्लीपिंग बुद्धा, 40 फीट, हरिपुर में है. हमारे पास पूरे पाकिस्तान में सबसे बड़ी और उच्चतम संख्या में सूफी मंदिर हैं.' खान ने कहा कि वे देश को पर्यटन के लिए खोल रहे हैं. करतारपुर साहिब सिखों के लिए प्रमुख तीर्थस्थल: पाकिस्तान में करतारपुर साहिब डेरा बाबा नानक मंदिर से लगभग चार किलोमीटर दूर रावी नदी के पार स्थित है. यह 1522 में सिख गुरु द्वारा स्थापित किया गया था. पहला गुरुद्वारा, गुरुद्वारा करतारपुर साहिब, यहाँ बनाया गया था. कहा जाता है कि गुरु नानक की मृत्यु इसी जगह हुई थी. करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब में भारतीय सिख तीर्थ यात्रियों की वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा प्रदान करने वाला करतारपुर कॉरिडोर जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है. गुरु नानक की जयंती मनाने के लिए हर साल भारत से हजारों सिख श्रद्धालु पाकिस्तान आते हैं. भारत ने करीब 20 साल पहले पाकिस्तान को कॉरिडोर का प्रस्ताव दिया था.

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उम्र 97 साल और जोश 27 साल का, जानिए क्या किया इस बुजुर्ग ने?

उम्र 97 साल और जोश 27 साल का, जानिए क्या किया इस बुजुर्ग ने?
कहते हैं उम्र सिर्फ एक नंबर है और 97 साल के इस बुजुर्ग ने यह बात साबित कर दी है. UAE में रहने वाले भारतीय मूल के एक बुजुर्ग का ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर हो गया था. इस उम्र में शायद ही कोई अपना लाइसेंस रिन्यू कराने की ज़हमत उठाए. लेकिन तेह्मेतेन होमी धुन्जीबोय मेहता ने अगले 4 साल के लिए ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू करा लिया है. मेहता का जन्म 1922 में हुआ था. वह दुबई की सड़कों पर गाड़ी चलाने वाले ऐसे पहले शख्स हैं जिनकी उम्र 90 से ज्यादा है. एनडीटीवी के अनुसार उम्र की इस दहलीज पर ड्राइविंग करने वाले मेहता अकेले शख्स नहीं हैं. ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के 97 वर्षीय पति प्रिंस फिलिप भी अब तक ड्राइविंग किया करते थे. लेकिन हाल ही उन्होंने अपनी स्वेच्छा से अपना ड्राइविंग लाइसेंस लौटा दिया क्योंकि एक हफ्ते पहले ही वो एक भयानक एक्सीडेंट से बाल-बाल बचे थे. इस एक्सीडेंट में उन्होंने दो महिलाओं को घायल कर दिया था. आखिरी बार 2004 में चलाई थी गाड़ी मेहता अकेले रहते हैं और उन्हें गाड़ी चलाने की कोई जल्दी नहीं है. उनका मानना है कि कारें लोगों को आलसी बनाती हैं. उन्हें पैदल चलना पसंद है और कई बार तो वह चार घंटे तक पैदल चलते हैं. लंबे अरसे से दुबई में रहने वाले मेहता ने पिछली बार 2004 में गाड़ी चलाई थी. आमतौर पर अपने सफर के लिए वह सार्वजनिक गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं. मेहता ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘किसी से मत कहिएगा. यह मेरी तंदरुस्ती और लंबी जिंदगी का राज़ है. मैं न सिगरेट पीता हूं और ना ही शराब को हाथ लगाता हूं.’ वह 1980 में दुबई आए थे और एक पांच सितारा होटल में राइटर की नौकरी करने लगे थे. इस होटल में 2002 तक काम किया. उस साल नियमित तौर पर कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच के दौरान उनकी उम्र का खुलासा हुआ और उन्हें इस्तीफा देने को कहा गया है.

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एक शहर जहां 100 साल से कम उम्र के लोग नहीं खरीद पाएंगे सिगरेट

एक शहर जहां 100 साल से कम उम्र के लोग नहीं खरीद पाएंगे सिगरेट
स्मोकिंग करना जानलेवा है. ये जानते हुए भी कई लोग सिगरेट की लत से बाहर नहीं आ पाते. ऐसे में स्मोकिंग की लत से छुड़ाने के लिए अमेरिका में अगले पांच सालों तक सिगरेट पर पूरी तरह बैन लग सकता है. दरअसल अमेरिका के सदन में एक कानून पेश किया गया है. इसके मुताबिक अगले पांच साल तक सिगरेट खरीदने वालों की न्यूनतम उम्र बढ़ाई जाएगी. जैसे अभी 21 साल से कम उम्र केलोग सिगरेट नहीं खरीद सकते. लेकिन 2020 में ये उम्र बढ़ाकर 30 साल कर दी जाएगी. यानी 30 साल से कम उम्र के लोग सिगरेट नहीं खरीद पाएंगे. इसके बाद 2021 में ये उम्र बढ़ाकर 40 साल कर दी जाएगी और 2022 में 50. इसके बाद 2023 में कम से कम उम्र बढ़ाकर 60 और 2024 में 100 कर दी जाएगी. यानी 2024 में 100 साल से कम उम्र के लोग सिगरेट नहीं खरीद पाएंगे. इस तरह अगले पांच सालों में अमेरिका के हवाई में सिगरेट खरीदने पर लगभग पूरी तरह पाबंदी लग जाएगी. इस काननू को संसद में रिपब्लिकन नेता सिथिंया शिएलेन ने पेश किया. उन्होंने कहा उनका मकसद हवाई को 2024 तक सिगरेट मुक्त करना है. इसके अलावा सिगरेट की लत से छुटकारा दिलाने के लिए हवाई में पहले भी कुछ ठोस कदम उठाए गए थे, जिसमें सिगरेट खरीदने की कम से कम उम्र 21 साल करना शामिल था. इसके अलावा पिछले 6 महीनों में कई और ठोस कदम भी उठाए थे. हालांकि सिथिंया का कहना है कि इन सभी कानूनों में कुछ न कमी थी. वहीं वॉशिंगटन पोस्ट को दिए गए एक इंटरव्यू में सिथिंया ने कहा, इन पांच सालों में सरकार सिगरेट से मिलने वाले रेवेन्यू की भरपाई करने के लिए भी कोई न कोई रास्ता निकाल लेगी. हालांकि ये कानून सिगार, तंबाकू और ई-सिगरेट पर लागू नहीं होगा. न्यूजीलैंड में भी आएगा नया कानून वहीं दैनिका भास्कर के मुताबिक बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए न्यूजीलैंड में भी सिगरेट को लेकर सख्त कानून बनाए जाएंगे. दरअसल कार में बच्चों के सामने सिगरेट पीने पर पाबंदी लगा दी जाएगी. यह प्रस्ताव जल्द ही संसद में लाया जाएगा, जिसके मुताबिक अगर कार में बच्चों के सामने कोई भी सिगरेट पीते हुए पकड़ा गया तो उसपर ढाई हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया जा सकता है. इसके अलावा सिगरेट पीने को लेकर भारत की बात की जाए तो देश में करीब 10 करोड़ से ज्यादा लोग सिगरेट पीते हैं और हर साल करीब 14 लोगों की इसकी वजह से मौत भी हो जाती है.

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इस इलाज से अब 48 घंटों के अंदर ठीक हो सकता है कैंसर

इस इलाज से अब 48 घंटों के अंदर ठीक हो सकता है कैंसर
भारत में एक के बाद एक सामने आ रहे कैंसर के मामलों से हर कोई परेशान है. खासकर गरीबों के लिए कैंसर जैसी बीमारी का इलाज करा पाना कई बार बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसे में अब बताया जा रहा है कि  कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को भी पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है. दरअसल अमेरिका की एक रिसर्च से इस बात का पता चला है. रिसर्च में पाया गया है कि  कैंसर के इलाज में इस्‍तेमाल होने वाली एक कुदरती चीज इतनी कारगर है कि इसको खाने के बाद मात्र 48 घंटों के अंदर कैंसर का इलाज संभव है. ये कुदरती चीज है अंगूर के बीज के रस. रिसर्च के मुताबिक कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी में कैंसर के मरीजों पर शोध करने के बाद ये नतीजे निकले हैं कि अगर कैंसर के मरीजों को अंगूर के बीज के रस का सेवन कराया जाए तो बहुत तेजी से इसके परिणाम दिखाई देने लगते हैं. कॉलेज के मेडिकल फिजिक्‍स एवं साइकोलॉजी के सीनियर प्रोफेसर डॉ. हर्डिन बी जॉन्‍स ने बताया कि करीब 25 सालों तक चली रिसर्च में सामने आया है कि अंगूर के बीज से निकलने वाला रस इस बीमारी पर बहुत तेजी से असर करता है. शोध में पाया गया है अंगूर के रस का प्रभाव इतनी तेजी से होता है कि करीब 48 घंटों के भीतर ही हमारे सामने नतीजे आने शुरू हो गए थे. भोपाल के प्राइवेट हॉस्‍पिटल केडॉक्टर नाजिम अली ने भी इस रिसर्च की पुष्टी की है. अंगूर में पर्याप्‍त मात्रा में कैलोरी, फाइबर और विटामिन सी और ई पाया जाता है. इसमें ग्‍लूकोज, मैग्‍नीशियम और साइट्रिक एसिड जैसे कई पोषक तत्‍व मौजूद रहते हैं. इसका सेवन करने से कैंसर, किडनी और पीलिया जैसी बीमारी को बचा जा सकता है. कैसे करता है काम? वैज्ञानिकों ने बताया कि अंगूर के बीजों से निकला रस ब्लड कैंसर सहित कई प्रकार के कैंसर के लिए काफी फायदेमंद है. अंगूर के बीज में पाया जाने वाला जेएनके प्रोटीन बिना किसी साइड इफेक्‍ट के कैंसर कोशिकाओं को करीब 76 प्रतिशत तक जड़ से खत्‍म किया जा सकता है. अगर चिकित्‍सकीय सलाह के अनुसार इसका नियमित सेवन करने से 48 घंटों के भीतर मरीज की सेहत में सुधार देखा जा सकता है.

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भारतीय इतिहासकार को मिलेगा इजराइल का प्रतिष्ठित डेन डेविड पुरस्कार

भारतीय इतिहासकार को मिलेगा इजराइल का प्रतिष्ठित डेन डेविड पुरस्कार
तकनीक से लेकर साहित्य हो या संगीत से लेकर विज्ञान, ऐसे ही हर क्षेत्र में दुनिया भर में भारतीय नागरिकों के योगदान को सराहा गया है. इसी कड़ी में अब इजराइल भी भारतीय इतिहासकार उस इस क्षेत्र में उसके योगदान को सम्मानित करने वाला है. जानेमाने भारतीय इतिहासकार संजय सुब्रमण्यम को इजराइल के प्रतिष्ठित डेन डेविड पुरस्कार के लिए चुना गया है. प्रारंभिक आधुनिक युग के दौरान एशियाई, यूरोपीय और उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका के लोगों के बीच अंतर-सांस्कृतिक संपर्क पर काम के लिए उन्हें इस साल के डेव डेविड पुरस्कार के लिए चुना गया है. स्ट्रैटिजिक एनालिस्ट के. सुब्रमण्यम के बेटे और पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर के भाई संजय ने वृहत इतिहास में अपने काम के लिए ‘अतीतकालीन आयाम’ श्रेणी में यह अवॉर्ड जीता है. हालांकि उनके साथ इस श्रेणी में एक और इतिहासकार को भी डेव डेविड पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है. संजय सुब्रमण्यम अपने अवार्ड को शिकागो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केनेथ पोमेरांज के साथ साझा करेंगे. इस इजरायली अवार्ड के साथ इतिहासकारों को 10 लाख अमेरिकी डॉलर भी दिए जाएंगे. इजरायल के इस डेन डेविड पुरस्कार से विश्वभर के उन लोगों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने विज्ञान, टेक्नोलॉजी और मानवतावाद के क्षेत्र में काफी अहम उपलब्धियों हासिल की हो.

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हनोई शिखर सम्मेलन के पहले होगी डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच मुलाकात

हनोई शिखर सम्मेलन के पहले होगी डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच मुलाकात
अमेरिका और नॉर्थ कोरिया, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच दूसरे शिखर सम्मेलन की तैयारी के लिए अगले सप्ताह बातचीत करेंगे. यह खबर उत्तर कोरिया के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि स्टीफन बेजगुन के बयान के एक दिन बाद आई है. बेजगुन ने कहा था कि वियतनाम में निर्धारित शिखर सम्मेलन से पहले दो देशों को और संवाद की आवश्यकता है. सियोल के राष्ट्रपति के प्रवक्ता किम यूई-कयाम ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'नॉर्थ कोरिया और अमेरिका 17 फरवरी के आस-पास एशिया में एक तीसरे देश में बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं.' बता दें कि ट्रंप और किम 27 से 28 फरवरी तक हनोई में मुलाकात करने वाले हैं, जो कि जून में सिंगापुर में उनके पहले शिखर सम्मेलन के बाद एक खास मुलाकात होगी. The United States and North Korea will hold further talks next week to prepare for a second summit between President Donald Trump and Kim Jong Un later this month, Seoul says https://t.co/nIphQirPUX — AFP news agency (@AFP) February 10, 2019 सिंगापुर में ट्रंप और किम की ऐतिहासिक बैठक में अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के नेताओं के बीच पहली बार एक दस्तावेज़ तैयार किया गया था. जिसमें किम ने 'कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त करने की दिशा में काम करने का वादा किया था.'

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अफगान सांसद का दावा, देश में एक दिन में हुए दो हवाई हमलों से 21 नागरिकों की मौत

अफगान सांसद का दावा, देश में एक दिन में हुए दो हवाई हमलों से 21 नागरिकों की मौत
अफगानिस्तान के दक्षिणी हेलमंद प्रांत में हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 21 नागरिकों की मौत हो गई है. क्षेत्र के एक सांसद ने रविवार को यह दावा किया. सांसद मोहम्मद हाशिम अल्कोजई ने कहा कि एक हमले में 13 नागरिकों की और दूसरे हमले में आठ नागरिकों की मौत हो गई. दोनों हवाई हमले सांगिन जिले में शुक्रवार देर रात उस समय किए गए जब नाटो के समर्थन वाले अफगानबलों और तालिबान के बीच लड़ाई चल रही थी. अल्कोजई ने बताया कि हवाई हमलों में कम से कम पांच अन्य लोग घायल हो गए. उन्होंने बताया, ‘हवाई हमलों के पीड़ितों में निर्दोष लोग ही शामिल हैं.’ उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों ने जनता के गुस्से को भड़का दिया है. प्रांतीय गवर्नर के प्रवक्ता उमर ज्वाक ने बताया कि उग्रवादियों ने एक असैन्य इलाके से अफगान बलों पर गोलियां चलानी शुरू कर दी. उन्होंने हवाई हमलों में नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि की लेकिन उन्होंने ज्यादा सूचना नहीं दी. उन्होंने कहा कि जांच शुरू कर दी गई है. द बेलिंगम हेराल्ड की खबर के मुताबिक, अल्कोजई ने कहा कि वो इन हमलों में निर्दोष नागरिकों की मौत का मुद्दा उठा चुके हैं, लेकिन इस पर अब तक कोई एक्शन नहीं लिया जा सका है. अफगानिस्तान के अधिकतर इलाकों में अपनी मौजूदगी रखने वाला तालिबान नियमित रूप से सुरक्षाबलों पर ये हमले करता रहता है. इसके इतर, गवर्नर के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह अमानी ने बताया कि तालिबान के लड़ाकों ने शनिवार को उत्तरी सरी पुल प्रांत में एक चेकपॉइंट पर हमला किया था, जिसमें आठ अफगान पुलिसकर्मियों की मौत हो गई और घंटों चली इस मुठभेड़ में तीन पुलिस वाले घायल हो गए. एक दूसरे चेकपॉइंट पर भी आतंकियों ने हमला किया, जिसमें तीन सैनिक मारे गए और चार घायल हो गए. (एजेंसी से इनपुट के साथ)

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कैश की किल्लत झेल रहे पाकिस्तान की मदद के लिए सऊदी अरब करेगा निवेश

कैश की किल्लत झेल रहे पाकिस्तान की मदद के लिए सऊदी अरब करेगा निवेश
नकदी के संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब एक बड़ा निवेश पैकेज तैयार कर रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी अरब का यह कदम उसके मुस्लिम सहयोगी देश के लिए नकदी और क्षेत्र की राजनीति की दृष्टि से भी राहतभरा होगा. ऐसा बताया जा रहा है कि इस निवेश में अरब सागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्वादर बंदरगाह में 10 अरब अमेरिकी डॉलर की रिफाइनरी और ऑयल कॉम्प्लेक्स में निवेश शामिल है. यह भारत-ईरान के चाबहार बंदरगाह से ज्यादा दूर नहीं है. सऊदी अरब के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएफपी से पुष्टि की है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन इस्लाम जल्द ही इस्लामाबाद का दौरा करने वाले हैं. हालांकि उन्होंने तारीख नहीं बताई. एएफपी को जानकारी मिली है कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे. प्रिंस क्राउन के इस हाई-प्रोफाइल दौरे से पहले रियाद और पाकिस्तान इस पूरी डील की डिटेल्स तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए दोनों देशों में कई महीनों से बातचीत के दौर चल रहे हैं. पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने एएफपी से बताया कि 'अबतक की बातचीत बहुत सकारात्मक रही है. ये निवेश पाकिस्तान में अब तक का सबसे बड़ा सऊदी अरब का निवेश होगा.' अधिकारी ने बताया नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि 'हम आशा कर रहे हैं कि सऊदी के क्राउन प्रिंस के पाकिस्तान दौरे के दौरान इसपर समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे.' बता दें कि पिछले महीने ही सऊदी अरब की पाकिस्तान में ग्वादर के गहरे पानी के बंदरगाह में10 बिलियन डॉलर की तेल रिफाइनरी स्थापित करने की योजना की घोषणा हुई थी. सऊदी के ऊर्जा मंत्री बताया था कि चीन की मदद से यह विकसित किया जा रहा है. पाकिस्तान तेल की बढ़ती कीमतों के कारण आंशिक रूप से बढ़ते चालू खाते के घाटे से निपटने के लिए निवेश और अन्य वित्तीय सहायता को आकर्षित करना चाहता है.

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Teddy day 2019: क्या आपने देखे हैं दुनिया के 5 सबसे महंगे टेडी बियर्स

Teddy day 2019: क्या आपने देखे हैं दुनिया के 5 सबसे महंगे टेडी बियर्स
7 फरवरी से वैलेंटाइन वीक शुरू हो चुका है. रोड डे, प्रपोज डे और फिर चोकलेट डे के बाद अब बारी टेडी दे की है. आज यानी 10 फरवरी को टेडी डे है. आज भी जब किसी अपने को कोई प्यारा सा गिफ्ट देने के बारे में सोचते हैं तो सबसे पहला खयाल टेडी का ही आता है. टेडी बियर ही एक ऐसा सॉफ्ट टॉय है जिसके साथ लोगों के इमोशन्स भी जुड़े होते हैं. आपने आज तक छोटे बड़े कई तरह के टेडी देखे होंगे लेकिन क्या आपने सबसे महंगा टेडी बियर देखा है. अगर नहीं देखे तो अब देख लीजिए. आज हम आपको  दुनियाभर में मौजूद पांच सबसे महंगे टेडी बियर्स के बारे में बताएंगे. इस लिस्ट में दुनिया सबसे पुराना टेडी बियर भी मौजूद है. ये टेडी 28 इंच का है जिसे Supreme x Louis Vuitton कंपनी ने बनाया है. इस टेडी से न सिर्फ लक्जरी मार्केट का लेवल हाई हुआ बल्कि बीबीसी चिल्ड्रन इन नीड नाम के एक संगठन को भी काफी फायदा पहुंचा. इस टेडी की कीमत $106,016.08 यानी करीब Rs.75 लाख रुपए है. ये दुनिया का सबसे पुराना टेडी बियर है जिसे 1904 में बनाया गया था. इस टेडी बियर को $105,000 यानी करीब 74 लाख रुपए में बेचा गया था. इस रंग बिरंगे टेडी बियर को देख कर आपको इसे खरीदने का दिल कर रहा होगा. लेकिन ये पहले बिक चुका है. खरीदने वालों ने इसे $60,609, करीब 43 लाख रुपए में खरीदा है. अब इस टेडी को ही देख लीजिए. दिखने में ये किसी आम टेडी बियर की तरह ही दिखता है लेकिन इसमें ऐसा बहुत कुछ है जो दूसरे टेडी बियर्स में नहीं मिलता. जैसे इसकी आंखें को बनाने में हीरों का इस्तेमाल किया गया है, वहीं नाक और मुंह सोने से बनाए गए हैं. इसके फर गोल्डन धागे से बुने गए हैं. सोने से बने इस टेडी बियर कीमत $35,000 यानी करीब 24 लाख रुपए है. अब बारी इस स्टाइलिश टेडी बियर की. काले रंग के कोटे और स्टाइलिश चश्में पहना ये टेडी आपतो काफी पसंद आ रहा होगा. लेकिन क्या आप इसकी कीमत जानते हैं. इसकी कीमत करीब 25 लाख रुपए यानी $3,687.26 है.

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Thursday, January 31, 2019

खुफिया एजेंसी के खुलासे से भड़के ट्रंप, उत्तर कोरिया नहीं कर रहा परमाणु हथियारों को नष्ट

खुफिया एजेंसी के खुलासे से भड़के ट्रंप, उत्तर कोरिया नहीं कर रहा परमाणु हथियारों को नष्ट
अमेरिका के प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों ने संसद को बताया है कि उत्तर कोरिया के वादे के मुताबिक परमाणु हथियारों को नष्ट करने की कोई उम्मीद नहीं है. इस बात पर राष्ट्रपति ट्रंप भड़क गए हैं. ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अमेरिका के उत्तर कोरिया के साथ संबंध सबसे अच्छे दौर में हैं. उन्होंने संकेत के तौर पर उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों में ठहराव, अमेरिकी सेवा के कुछ सदस्यों की वापसी और वहां हिरासत में लिए गए कुछ अमेरिकियों की रिहाई का जिक्र किया. इसके बाद भी, राष्ट्रीय खुफिया निदेशक डैन कोट्स ने कांग्रेस को मंगलवार को बताया कि खुफिया जानकारी से इस बात की संभावना नहीं दिख रही है कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन अपने परमाणु हथियारों को नष्ट करेंगे. पिछले साल ट्रंप से मुलाकात के बाद किम ने निरस्त्रीकरण को लेकर प्रतिबद्धता जताई थी और परमाणु परीक्षण को लेकर अमेरिका की बात मानी थी. गौरतलब है कि फरवरी में ट्रंप और किम के बीच दूसरी मुलाकात होने की उम्मीद है. ये भी पढ़ें: लालू यादव की तबीयत फिर बिगड़ी, लगातार दूसरे दिन आया चक्कर, गिरते-गिरते बचे ये भी पढ़ें: फॉरेन करंसी की स्मगलिंग के आरोप में फंसे राहत फतेह अली खान, ED ने भेजा नोटिस

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वेनेजुएला ने अज्ञात जगह पर भेजे जाने के लिए तैयार रखा है 20 टन सोना

वेनेजुएला ने अज्ञात जगह पर भेजे जाने के लिए तैयार रखा है 20 टन सोना
वेनेजुएला के लॉ मेकर जोस गुएरा ने मंगलवार को ट्विटर पर एक बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि  रूसी बोइंग 777, जिस दिन काराकास में उतरा था, उससे पहले देश के केंद्रीय बैंक से 20 टन सोना निकाल लिया गया था. इस दावे ने सोशल मीडिया पर आक्रोश बढ़ा दिया. हालांकि जब उनसे पूछा गया कि उन्हें यह कैसे पता है, तो गुएरा ने कोई सबूत नहीं दिया. यह कयास लगाया जा रहा है कि यह संकटग्रस्त वेनेजुएला की दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश हो सकती है. लेकिन इस निष्कर्ष पर आने के पहले ये बता दें कि गुएरा एक पूर्व केंद्रीय बैंक अर्थशास्त्री हैं जो अभी भी वहां के पुराने सहयोगियों के संपर्क में रहते हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने ब्लूमबर्ग न्यूज को मंगलवार को बताया कि लोडिंग के लिए केंद्रीय बैंक में 20 टन सोना अलग रखा गया है. व्यक्ति ने कहा कि कुछ 840 मिलियन डॉलर के मूल्य का यह सोना, वेनेजुएला में इस धातु का कुल 20 प्रतिशत है. अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद वेनेजुएला में महंगाई चरम पर पहुंच गई है. सत्ता के संघर्ष के लिए वहां राजनीतिक और आर्थिक हालात भी बद्तर हो गए हैं. जिसके चलते भयंकर आर्थिक संकट पैदा हो गया है. वेनेजुएला के पास अपने संरक्षक रूस और चीन के साथ-साथ बॉन्डहोल्डर्स के अरबों बकाया हैं, और उसको अपने लोगों के लिए भोजन खरीदने के लिए मुद्रा की भी आवश्यकता है.

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'लोकसभा चुनाव 2019 से पहले भारत में हो सकती है सांप्रदायिक हिंसा'

'लोकसभा चुनाव 2019 से पहले भारत में हो सकती है सांप्रदायिक हिंसा'
अमेरिकी खुफिया विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने भारत में इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले सांप्रदायिक हिंसा होने की आशंका जताई है. खुफिया विभाग के निदेशक डैन कोट्स ने अमेरिकी सीनेट (संसद) में एक रिपोर्ट पेश की है जिसमें इस बात का जिक्र है. उन्होंने अमेरिकी सांसदों को बताया कि सत्तारूढ़ बीजेपी अप्रैल-मई (2019) में देश में होने वाले आम चुनावों से पहले हिंदू राष्ट्रवाद पर ही जोर देती रही तो सांप्रदायिक हिंसा की आशंका प्रबल है. उन्होंने बताया कि भारत और चीन के बीच इस साल रिश्ते तनावपूर्ण रहने की आशंका है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने के भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के प्रयासों के बावजूद उनके संबंधों में तनाव बना रहेगा. कोट्स ने पाकिस्तान पर बोलते हुुए कहा कि उसे 'कुछ समूहों का नीतिगत तौर पर इस्तेमाल कर आतंकवाद निरोधक सहयोग के प्रति संकीर्ण रवैया दिखाना और केवल उन आतंकवादी समूहों से निपटना जिससे पाकिस्तान को सीधे तौर पर खतरा हो, निश्चित तौर पर तालिबान के खिलाफ आतंकवाद निरोधी अमेरिकी प्रयासों को भी चौपट कर देगा.' कोट्स ने खुफिया मुद्दों पर संसद (सीनेट) की प्रवर समिति के सदस्यों को बताया, 'पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूह भारत और अफगानिस्तान के अलावा अमेरिकी हितों के खिलाफ हमलों की योजना बनाने और अंजाम देने के लिए पाकिस्तान में अपने पनाहगाहों का फायदा उठाना जारी रखेंगे.' कोट्स और अन्य अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के प्रमुख विश्वव्यापी खतरे पर आकलन को लेकर खुफिया पर सीनेट की प्रवर समिति के समक्ष पेश हुए, जिस दौरान उन्होंने यह रिपोर्ट पेश की. वहीं उन्होंने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रमों के निरंतर विकास और वृद्धि के चलते दक्षिण एशिया में परमाणु सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की आशंका बढ़ गई है. (भाषा से इनपुट)

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