Friday, February 1, 2019

बजट से पहले लोगों को मिली राहत, बिना सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर की हुई इतनी कीमत

बजट से पहले लोगों को मिली राहत, बिना सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर की हुई इतनी कीमत
मोदी सरकार शुक्रवार को अंतरिम बजट पेश करने वाली है. इसके पहले ही लोगों को घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ी राहत मिली है. दरअसल, घरेलू रसोई गैस के सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत बीते गुरुवार को 1.46 रुपए सस्ती हो गई है, जबकि बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर का दाम 30 रुपए कम हुआ है. न्यूज 18 की खबर के अनुसार सरकारी पेट्रोलियम ईंधन वितरण कंपनियों ने रसोईं गैस सिलेंडर के दाम में एक महीने में लगातार तीसरी बार कमी की है. कीमत में कमी होने की मुख्य वजह इस ईंधन पर कर का भार कम होना है. बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत 30 रुपए कम देश की सबसे बड़ी रसोई गैस कंपनी इंडियन ऑयल ने एक बयान में कहा कि बीते गुरुवार की मध्यरात्रि से दिल्ली में सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के गैस सिलेंडर की कीमत 493.53 रुपए होगी, जो अभी 494.99 रुपए है. इसी तरह बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत भी 30 रुपए घटकर अब 659 रुपए प्रति सिलेंडर की गई है. बजट सत्र की शुरुआत संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ हुई. संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा और यह वर्तमान सरकार के तहत संसद का यह अंतिम सत्र होगा. इस सत्र के दौरान 10 बैठकें होंगी. वहीं आज 1 फरवरी को मौजूदा सरकार के जरिए अपने कार्यकाल का आखिरी बजट पेश किया जाएगा. यह 16वीं लोकसभा का आखिरी बजट सत्र है. सरकार का यह बजट लोकसभा चुनाव पर केंद्रित हो सकता है दरअसल, अरुण जेटली की सेहत से जुड़ी समस्या के चलते पीयूष गोयल को वित्त मंत्री का प्रभार सौंपा गया है. जिसके कारण वित्त मंत्री पीयूष गोयल आज अंतरिम बजट पेश करेंगे और ऐसी उम्मीद की जा रही है कि सरकार इसमें समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण से जुड़ी अनेक उपायों की घोषणा कर सकती है. वहीं इस साल लोकसभा चुनाव भी होने हैं. ऐसे में संभावनाएं बनी हुई है कि सरकार का यह बजट लोकसभा चुनाव पर केंद्रित हो सकता है. वहीं सरकार के जरिए अगर किसी तरह की लोकलुभावन घोषनाएं भी इस बजट के जरिए की जाती है तो ऐसी उम्मीदें है कि विपक्ष की ओर से सरकार के लोकलुभावन घोषणाओं का विरोध किया जा सकता है.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2UsqMS8

CBI चीफ पर चयन समिति की बैठक से पहले सरकार ने 4 अधिकारियों को किया नियुक्त

CBI चीफ पर चयन समिति की बैठक से पहले सरकार ने 4 अधिकारियों को किया नियुक्त
सीबीआई के नए प्रमुख पर फैसला के लिए उच्चाधिकार चयन समिति की बैठक के एक दिन पहले सरकार ने केंद्रीय जांच एजेंसी में चार अधिकारियों की नियुक्ति की है. अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इन अधिकारियों की नियुक्ति में माना जा रहा है कि सरकार ने सीबीआई के अंतरिम प्रमुख एम. नागेश्वर राव के दृष्टिकोण पर भी गौर किया. सरकारी आदेश में कहा गया है कि असम-मेघालय कैडर से 2003 बैच के आईपीएस अखिलेश कुमार सिंह और तमिलनाडु कैडर से 2004 बैच के आईपीएस ए टी दुरई कुमार को सीबीआई में डीआईजी बनाया गया है. केरल कैडर से 2008 बैच के आईपीएस पुत्ता विमलादित्य और उत्तरप्रदेश से 2009 बैच के आईपीएस अखिलेश कुमार चौरसिया को एजेंसी में पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है. सीबीआई के नए निदेशक के नाम पर अब तक कोई फैसला नहीं हो सका. बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चयन समिति की बैठक होने वाली थी, जो अब शुक्रवार तक के लिए टल गई है. पीएम मोदी की व्यस्तता और दिल्ली से बाहर होने के कारण समिति की बैठक नहीं हो पाई. अब अगले शुक्रवार को ही तय होगा कि सीबीआई का अगला निदेशक कौन होगा. पीएम मोदी, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगई और लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सीबीआई के अगले निदेशक का फैसला करेंगे. गौरतलब है कि सीबीआई के अगले डायरेक्टर के नाम पर बीते 24 जनवरी को भी बैठक हुई थी, जो बेनतीजा रही. 10 जनवरी को आलोक वर्मा को सीबीआई डायरेक्टर के पद से हटाए जाने के बाद से ही यह पद खाली पड़ा है. बुधवार को बैठक टलने के बाद यह तय हो गया है कि देश की पहली महिला सीबीआई डायरेक्टर बनने की तमन्ना पाले बैठी रीना मित्रा अब इस रेस से बाहर हो जाएंगी. रीना मित्रा 31 जनवरी को रियाटर हो रही हैं और सीबीआई डायरेक्टर के चयन करने वाली पैनल की अगली बैठक शुक्रवार को यानी 1 फरवरी को होगी. (भाषा से इनपुट)

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2MJVpQr

Budget 2019 Live: 5 लाख तक के इनकम पर नहीं लगेगा टैक्स, मिडिल क्लास को बड़ी राहत

Budget 2019 Live: 5 लाख तक के इनकम पर नहीं लगेगा टैक्स, मिडिल क्लास को बड़ी राहत
बजट सत्र की शुरुआत संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ हुई. संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा और यह वर्तमान सरकार के तहत संसद का यह अंतिम सत्र होगा. इस सत्र के दौरान 10 बैठकें होंगी. वहीं आज 1 फरवरी को मौजूदा सरकार के जरिए अपने कार्यकाल का आखिरी बजट पेश किया जाएगा. यह 16वीं लोकसभा का आखिरी बजट सत्र है. दरअसल, अरुण जेटली की सेहत से जुड़ी समस्या के चलते पीयूष गोयल को वित्त मंत्री का प्रभार सौंपा गया है. जिसके कारण वित्त मंत्री पीयूष गोयल आज अंतरिम बजट पेश करेंगे और ऐसी उम्मीद की जा रही है कि सरकार इसमें समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण से जुड़ी अनेक उपायों की घोषणा कर सकती है. वहीं इस साल लोकसभा चुनाव भी होने हैं. ऐसे में संभावनाएं बनी हुई है कि सरकार का यह बजट लोकसभा चुनाव पर केंद्रित हो सकता है. वहीं सरकार के जरिए अगर किसी तरह की लोकलुभावन घोषनाएं भी इस बजट के जरिए की जाती है तो ऐसी उम्मीदें है कि विपक्ष की ओर से सरकार के लोकलुभावन घोषणाओं का विरोध किया जा सकता है. इन पर रहेगा फोकस वहीं सरकार इस बार बजट में इनकम टैक्स में छूट का दायरा बढ़ाकर मिडिल क्लास के लोगों को राहत दे सकती है. साथ ही इस बार केंद्र सरकार का फोकस किसानों पर भी बना रह सकता है. सरकार के जरिए किसानों के लिए किसी प्रकार की खास घोषणा इस बजट के माध्यम से की जा सकती है. वहीं बीमा और हेल्थ सेक्टर को भी इस बार बजट से काफी उम्मीदें बनी हुई है. साथ ही जीएसटी को लेकर भी सरकार के जरिए बजट के माध्यम से नई घोषणा की जा सकती है. गोल्ड पॉलिसी का इंतजार काफी समय से है, ऐसे में सरकार के जरिए इस बजट में गोल्ड पॉलिसी की घोषणा भी संभव है. वहीं बजट सत्र के दौरान कई अध्यादेशों के स्थान पर विधेयक पारित कराने का सरकार प्रयास करेगी. इसमें मुस्लिम महिला विवाह के अधिकार की सुरक्षा अध्यादेश 2019, भारतीय मेडिकल काउंसिल संशोधन अध्यादेश 2019, कंपनी संशोधन अध्यादेश 2019 शामिल है. इसके अलावा सत्र के दौरान मानव तस्करी की रोकथाम संबंधी विधेयक, आधार संबंधी संशोधन विधेयक, उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, डीएनए प्रौद्योगिकी नियमन विधेयक, राष्ट्रीय मेडिकल आयोग विधेयक, नागरिकता संशोधन विधेयक भी पारित कराने का प्रयास किया जाएगा .

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2GeKkG0

Union Budget 2019 Live: जानिए, कब और कैसे देखें बजट की Live Streaming और Budget Speech

Union Budget 2019 Live: जानिए, कब और कैसे देखें बजट की Live Streaming और Budget Speech
1 फरवरी यानी आज देश का अंतरिम बजट पेश किया जाना है. आज वित्त मंत्रालय का प्रभार देख रहे रेल मंत्री पीयूष गोयल संसद में बजट पेश करेंगे. अगले दो महीनों में 2019 के आम चुनाव होने हैं, इसलिए इस वर्तमान लोकसभा का ये आखिरी संसद सत्र है. अगर आप बजट से जुड़ी नई घोषणाएं जानने के लिए संसद से बजट सत्र का सीधा प्रसारण देखना चाहते हैं, तो आपके पास कई ऑप्शन हैं. पीयूष गोयल अपना बजट भाषण लोकसभा में 11 बजे शुरू करेंगे. टीवी पर राज्यसभा और लोकसभा चैनलों पर तो इसका प्रसारण होगा ही, आप इंटरनेट पर प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के यूट्यूब चैनल पर भी इसकी लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं. चैनल 11 बजे से बजट सत्र का लाइव स्ट्रीम चलाएगा. इसके लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आपको बजट के लाइव अपडेट्स की जानकारी लगातार यहां भी मिलती रहेगी. बता दें कि ये साल का अंतरिम बजट है. चूंकि सरकार इसमें लोकलुभावन घोषणाएं तो जरूरी कर सकती है क्योंकि ये चुनावी साल है लेकिन ये बजट मुख्य रूप से अगले चार महीनों के लिए सरकार चलाने के लिए खर्च का लेखा-जोखा दिया जाएगा. अगली सरकार बनने तक के लिए इसमें सरकार का बजट होगा. जब नई सरकार बन जाएगी तो उसके बाद जुलाई में पूर्ण बजट पेश किया जाएगा. रेल मंत्री पीयूष गोयल इस बार बजट पेश कर रहे हैं. वो इसी बजट के साथ रेल मंत्रालय का बजट भी पढ़ेंगे. वैसे भी रेलवे बजट अब अलग से पेश नहीं किया जाता.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2DMJQFo

अंडरवर्ल्ड डॉन रवि पुजारी सेनेगल से गिरफ्तार, जल्द लाया जाएगा भारत

अंडरवर्ल्ड डॉन रवि पुजारी सेनेगल से गिरफ्तार, जल्द लाया जाएगा भारत
भारत के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है. अफ्रीकी देश सेनेगल से अंडरवर्ल्ड डॉन रवि पुजारी को गिरफ्तार कर लिया गया है. बताया जा रहा है कि भारतीय एजेंसियों की ओर से मिली सूचना के आधार पर सेनेगल पुलिस ने कार्रवाई की. पुजारी को 22 जनवरी को गिरफ्तार किया गया और 26 जनवरी को भारतीय दूतावास को इसकी जानकारी दी गई. अब जल्द ही विशेष विमान से उसे भारत लाया जा सकता है. अफ्रीकन मीडिया की खबरों के अनुसार पुजारी के एंथनी फर्नांडेज के नाम का फर्जी पासपोर्ट इस्तेमाल कर रहा था. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुजारी की लोकेशन बुर्किना फासो में मिली थी, जिसके बाद उसे ट्रेक करते हुए सेनेगल से पकड़ा गया. सेनेगल में पकड़े जाने से पहले तक खबरें आ रही थीं कि रवि पुजारी ऑस्ट्रेलिया में है. पुजारी अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के लिए काम किया करता था. जो कि अभी नवी मुंबई की एक जेल में बंद है. आपको बता दें कि रवि पुजारी लगभग 15 साल से भारत से फरार है. उस पर फिरौती, हत्‍या, ब्‍लैकमेल और धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं. उस पर बॉलीवुड सितारों से लेकर छात्र नेताओं तक को धमकाने और फिरौती मांगने के मामले दर्ज हैं. पिछले साल रवि पुजारी गैंग ने दलित नेता और गुजरात के वडगाम से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी, जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व नेता शेहला रशीद और छात्र नेता उमर खालिद को जान से मारने की धमकी दी थी. उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया जा चुका है.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2GdYaZ4

जम्मू-कश्मीर: राजपोरा इलाके में मुठभेड़ में 2 आतंकी ढेर, पिछले 24 घंटे में हुए दो बड़े हमले

जम्मू-कश्मीर: राजपोरा इलाके में मुठभेड़ में 2 आतंकी ढेर, पिछले 24 घंटे में हुए दो बड़े हमले
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के राजपोरा इलाके में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए हैं. इनकी पहचान शहीद अहमद बाबा और अनियत अहमद जिगर के रूप में हुई है. दोनों आतंकवादियों के जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े होने की बात सामने आई है. उनके पास से एक एसएलआर और एक पिस्टल बरामद की गई है. बता दें कि जम्मू-कश्मीर में पिछले दो दिन में दो आतंकी हमले हुए थे. इन हमलों में सीआरपीएफ के दो जवान समेत कुल 12 लोग घायल हुए थे. इसके बाद से ही सुरक्षा बल जगह-जगह कॉबिंग कर आतंकियों की तलाश में जुटे थे. Jammu and Kashmir: Two terrorists killed in encounter with security forces in Rajpora area of Pulwama, identified as Shahid Ahmad Baba and Aniyat Ahmad Ziger. Both terrorists are affiliated with Jaish-e-Mohammed (JeM). One SLR and one Pistol recovered from them. https://t.co/EDXk1xmvZF — ANI (@ANI) February 1, 2019 आतंकियों ने दम्हाल हांजीपोरा कुलगाम में ग्रेनेड हमला किया था आतंकियों ने बीते गुरुवार को शेरबाग अनंतनाग में सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हुए ग्रेनेड हमला किया था. हमले में दो सीआरपीएफ जवान समेत 8 लोग जख्मी हो गए थे. हमले के बाद आतंकी वहां से भागने में कामयाब रहे. बीते चौबीस घंटों में दक्षिण कश्मीर में सुरक्षाबलों पर यह दूसरा आतंकी हमला है. इससे पूर्व पिछले बुधवार को आतंकियों ने दम्हाल हांजीपोरा कुलगाम में पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड हमला किया था, जिसमें चार लोग जख्मी हो गए थे. प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते गुरुवार को दोपहर 12 बजे के करीब आतंकियों ने शेरबाग में पुलिस चौकी के बाहर बाजार में खड़े सीआरपीएफ के जवानों को निशाना बनाते हुए ग्रेनेड से हमला किया था. ग्रेनेड जवानों से कुछ ही दूरी पर गिरा और एक जोरदार धमाके के साथ फट गया. धमाके के साथ फैली अफरा-तफरी में आतंकी भागने में कामयाब रहे थे ग्रेनेड से हुए धमाके में 6 लोग जिनमें चार महिलाएं जबकि दो सीआरपीएफ कर्मी जख्मी हुए हैं. घायलों की पहचान इरफान अहमद डार, मोहम्मद हुसैन भट्ट, इसके अलावा चार महिलाएं भी शामिल हैं जिनके नाम रिहाना पत्नी हाजी गुलाम नबी, उसकी बेटी साहिबा, सौफिया और नाजा के रूप में हुई है. वहीं घायल सीआरएफ जवानों की पहचान नरेंद्र कुमार और विशाल पाटिल के रूप में हुई है. धमाके के साथ वहां फैली अफरा-तफरी में आतंकी भागने में कामयाब रहे. पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त कार्यदल ने पूरे इलाके को घेरते हुए आतंकियों की धरपकड़ के लिए एक तलाशी अभियान चलाया. फिलहाल,किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2MNC9lm

सरकार के ड्रोन से निगरानी और दूसरे उपायों के दावे के बावजूद गुजरात में रेत-माफिया फल-फूल रहा है

सरकार के ड्रोन से निगरानी और दूसरे उपायों के दावे के बावजूद गुजरात में रेत-माफिया फल-फूल रहा है
अस्पताल के बिस्तर पर बैठे नयन कलोला कहते हैं, 'मैं तो सिर्फ ओजत नदी में वियर (बहाव को नियंत्रित करने के लिए नदी के किनारे बनाए गए बंधे) के करीब धड़ल्ले से चल रहे रेत खनन को रोकना चाहता था.' गुजरात में जगन्नाथ जिले के अच्छी बागवानी वाले वनथाली कस्बे के एक स्थानीय किसान व आरटीआई एक्टिविस्ट कलोला को रेत माफिया ने उनकी कारगुजारियों का विरोध करने के लिए आठ महीने पहले अगवा करके बेरहमी से पीटा था और वह अभी तक बिस्तर से उठ नहीं सके हैं. 45 वर्षीय कलोला को पिछले साल मई में कार सवार बदमाशों ने उस समय अगवा कर लिया था, जब वह अपने खेत की ओर जा रहे थे. यह उसी दिन हुआ था जब ओजत नदी में अवैध रेत खनन के खिलाफ स्थानीय लोगों ने वनथाली कस्बे में दिन भर का बंद बुलाया था. वह याद करते हैं कि बस स्टैंड के पास एक कार में जबरदस्ती बिठाने के बाद, उन्हें पास के एक गांव में ले जाया गया जहां करीब आधा दर्जन लोगों ने उन्हें लोहे की रॉड से पीटा. हमलावरों ने उन्हें गंभीर नतीजे भुगतने की चेतावनी दी और उन्हें रेत खनन के मामले में दखल नहीं देने के लिए कहा. राज्य सरकार द्वारा करीब एक दशक पहले बनाए गए इस बंधे ने इस इलाके को संपन्न बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है. इसने न केवल आसपास के इलाके की 50,000 से अधिक आबादी को बेहतर पेयजल आपूर्ति में मदद की है, बल्कि भू-जल स्तर को सुधारने और समुद्र से मिट्टी में होने वाले खारेपन की समस्या पर भी रोक लगाई. इससे पूरा क्षेत्र मशहूर केसर आम, केला, चीकू और जामुन के उत्पादन के बड़े बागवानी क्षेत्र में बदल गया. तत्कालीन जिला कलेक्टर ने गुजरात हाईकोर्ट के 2003 के दिशानिर्देशों, जो इस तरह की गतिविधि को प्रतिबंधित करता है, की धज्जियां उड़ाते हुए बंधे के पास रेत खनन की इजाजत दी थी. कलोला बताते हैं, 'जिन लोगों को लीज दी गई थी, वो नदी के किनारे नुकसानदेह स्तर से ज्यादा गहराई तक खुदाई कर रहे थे. अगर यह नदी में रेत-खनन के लिए अदालत के दिशानिर्देश के अनुसार कहीं भी 3 मीटर तक सीमित होता, तो यह हम फिर भी बर्दाश्त कर लेते, लेकिन वे अंधाधुंध खनन कर रहे थे और यह हमारे लिए तबाही ला सकता था. नदी-तल में अंधाधुंध रेत खनन के कई प्रतिकूल नतीजे हुए. इसने नदी के बहाव को बदल दिया जिससे कई बार बाढ़ आई और अगर ऐसा ही चलता रहता तो हमारी जिंदगी बर्बाद हो जाती. हम अपनी आजीविका के लिए नदी पर निर्भर हैं और रेत माफिया को सिर्फ पैसे से मतलब है. कलोला की कहानी गुजरात में रेत माफिया की आपराधिक प्रकृति से जुड़े कई मामलों में से एक है, जहां देश के अन्य हिस्सों की तरह मोटे तौर पर दो तरह से अवैध रेत खनन चल रहा है. [caption id="attachment_188243" align="alignnone" width="1002"] नयन कलोला[/caption] पहला राज्य भर में 60 से अधिक नदियों में कानूनी रूप से पट्टे पर लिए गए क्षेत्रों में अवैध खनन करना यानी नियमों की धज्जियां उड़ाना और अनुमति दी गई गहराई से अधिक खुदाई करके अनुमति से अधिक रेत निकालना. दूसरा पूरी तरह से अवैध है और यहां बिना किसी अनुमति के रेत का खनन हो रहा है. गुजरात में विपक्षी कांग्रेस के दो मुखर विधायकों जवाहर चावड़ा और ललित वसोया आरोप लगाते हैं कि अवैध रेत खनन में पुलिस, खनन व भूविज्ञान विभाग और सड़क परिवहन विंग सहित सरकार के विभिन्न विभागों के बीच साठगांठ है. जूनागढ़ जिले के माणावदर से विधायक चावड़ा कहते हैं, 'सरकार के इस पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाए जाने के दावे के बावजूद, हकीकत में कुछ भी नहीं किया गया है. यह चारों तरफ खुलेआम चल रहा है.' विधायक चावड़ा ने एक्टिविस्ट कलोला पर हमले के विरोध में हुए प्रदर्शन में भाग लिया था और पुलिस ने उन्हें हिरासत में भी लिया था. उन्होंने उस समय ओजत नदी के पास पट्टे को निरस्त कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. चावड़ा आरोप लगाते हैं, 'स्थानीय पुलिस से लेकर सरकार के ऊपरी स्तर तक, सभी की रेत के अवैध धंधे में हिस्सेदारी है. रेत माफिया को हर स्तर पर पूरी सुरक्षा दी जाती है. सभी को ‘मुफ्त’ मिलने वाली रेत के लिए खनन अधिकारियों को एक बस तय धनराशि का भुगतान करना होगा, जो इसके एवज में अवैध धंधे से सुरक्षा के लिए पुलिस सहित सभी को निचले पायदान से लेकर ऊपरी स्तर तक हिस्सा बांटते हैं.' राजकोट जिले के धोराजी से विधायक वसोया भादर नदी, जो कि इस क्षेत्र में उद्योगों के साथ-साथ कारोबार के लिए भी एक महत्वपूर्ण जल संसाधन है, में प्रदूषण और अवैध रेत खनन के खिलाफ अभियान चला रहे हैं. वसोया कहते हैं कि राज्य विधानसभा में और अन्य मंचों पर इस मुद्दे को उठाने के बावजूद पुलिस व दूसरे विभागों और रेत माफिया के बीच साठगांठ के चलते धंधा बेरोक-टोक चल रहा है. वह कहते हैं, 'हमारे अंदाजे के मुताबिक सिर्फ भादर से ही अवैध रूप से कम से कम 40 टन बालू से भरे 400 ट्रक रेत रोजाना निकाली जाती है.' घायल आरटीआई एक्टिविस्ट और दो विधायकों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि सुदूर आदिवासी बहुल छोटा उदयपुर जिले में ओरसंग नदी में धड़ल्ले से चल रहे अवैध रेत खनन के बारे में एक स्थानीय पत्रकार द्वारा बताई गई स्टोरी से भी होती है. वह नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, 'रेत माफिया बहुत ताकतवर हैं और कुछ भी कर सकते हैं. यहां तक कि स्थानीय पत्रकार भी उनसे डरते हैं. वो लोगों को धमकी देते हैं कि उन लोगों को एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत फंसा देंगे या मार डालेंगे. उन्होंने इस समुदाय के लोगों को अपने साथ मिला लिया है और विरोधियों के खिलाफ उन्हें आगे कर देते हैं. उनके पास पूरी पुलिस सुरक्षा है क्योंकि वे उन्हें भुगतान करते हैं. वह बताते हैं, 'उनके पास इतना ज्यादा पैसा इसलिए है क्योंकि उन्हें रेत के लिए किसी भी रॉयल्टी या कीमत का भुगतान नहीं करना होता. वे ट्रकों में ओवरलोडिंग भी करते हैं. वे नदी से रेत उठाते हैं और उसे बाजार में बेच देते हैं. उनके खिलाफ कोई नहीं बोलता, क्योंकि पुलिस कभी कुछ नहीं करती. एक ट्रैक्टर रेत के लिए वे करीब 2000 रुपए का अवैध भुगतान करते हैं और 5000-6000 रुपए कमाते हैं. राज्य भर में इस धंधे के कारण सरकार को करोड़ों रुपए की रॉयल्टी का नुकसान होता है. इस समय साधारण रेत की रॉयल्टी प्रति टन 40 रुपए है. अवैध रेत का कारोबार सैकड़ों करोड़ का है.' दूसरी ओर, राज्य के खनन और भूविज्ञान विभाग का दावा है कि हाल के दिनों में राज्य सरकार द्वारा किए गए कई उपायों जिनमें ड्रोन निगरानी-आधारित छापे शामिल हैं, से अवैध रेत खनन के खिलाफ अच्छे नतीजे मिल रहे हैं. [caption id="attachment_187726" align="alignnone" width="1002"] प्रतीकात्मक तस्वीर[/caption] राज्य में मृदा एवं भूविज्ञान विभाग में अतिरिक्त निदेशक डीएम शुक्ला बताते हैं कि पिछले साल मई में चार नदियों- साबरमती, तापी, ओरसांग और भादर में पायलट परियोजना के तहत सीएम विजय रूपाणी द्वारा त्रिनेत्र ड्रोन सर्विलांस सिस्टम का उद्घाटन किया गया था. इस परियोजना में अब नर्मदा, माही और भोगावो नदियों को भी शामिल कर लिया गया है. वह कहते हैं, 'सभी जिलों में गड़बड़ी को रोकने के लिए टास्क फोर्स भी बनाई गई है. इन सबके नतीजे में इसमें लगभग 50% की कमी आई है. ड्रोन आधारित छापे से अवैध रेत खनन करने वालों में डर पैदा हो गया है.' ड्रोन प्रणाली कैसे काम करती है, इस बारे में विस्तार से बताते हुए वह कहते हैं कि मुखबिर अवैध खनन के बारे में जानकारी देते हैं और फिर बाहरी एजेंसी द्वारा संचालित इन ड्रोनों को साइट पर भेजा जाता है. 'ये अवैध खनन करने वालों के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने में हमारी मदद करते हैं. करीब 120 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए ये जमीन से एक छोटी चिड़िया की तरह दिखते हैं और इनका आसानी से पता भी नहीं लगाया जा सकता है. पहले जब पुलिस और खनन विभाग की टीमें ऐसी जगहों पर जाती थीं, तो वो भाग जाते थे. इसके अलावा पहले सबूतों की कमी के कारण उन्हें अदालत से सजा दिलाना और जुर्माना लगाना मुश्किल था. (रजनीश मिश्रा अहमदाबाद स्थित फ्रीलांस लेखक हैं और 101Reporters.com के सदस्य हैं, जो जमीनी स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों का अखिल भारतीय नेटवर्क है.)

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2HGpr8Z

45 सालों में बेरोजगारी सबसे ज्यादा, NSSO के आंकड़े प्रामाणिक या विवादास्पद?

45 सालों में बेरोजगारी सबसे ज्यादा, NSSO के आंकड़े प्रामाणिक या विवादास्पद?
भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई भी ऐसा आंकड़ा, जो रिजर्व बैंक की निगरानी के दायरे से बाहर का हो, उसमें हाल के दिनों में पारदर्शिता की भारी कमी देखी गई है. खास तौर से जीडीपी के 2011-12 की बैक सीरीज के बेस के आधार पर तैयार किए गए आंकड़ों में तो पारदर्शिता की भारी कमी देखी गई है. इस माहौल में अगर कोई आंकड़ा बेरोजगारी से जुडा है, तो वो और भी विवादित हो जाता है. क्योंकि ये आंकड़ा तो तमाम कंपनियों की सालाना रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया जाता है और कंपनियों की सालाना रिपोर्ट हकीकत से कितनी दूर होती है, इसका बस अंदाजा लगाया जा सकता है. ऐसे में सीएमआईई-ईपीएफओ के आंकड़े सियासी एंगल जुड़ने की वजह से और भी विवादित हो गए हैं. रोजगार तब पैदा होते हैं, जब अर्थव्यवस्था बढ़ती है. ऐसे में जब भी तरक्की की ये रफ्तार धीमी होती है, तो रोजगार पैदा होने की रफ्तार पर भी असर पड़ता है और नौकरियों की संभावनाएं कम होने लगती हैं. दिक्कत तब होती है जब सियासी तौर पर खुद को कद्दावर साबित करने के लिए ये दावे किए जाने लगते हैं कि नौकरियों के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं. इनमें कमी नहीं आई है. ऐसे मौके पर ईपीएफो के आंकड़ों को ही सही मानने की वकालत की जाती है. लेकिन ईपीएफओ में नए नाम जुड़ने का मतलब सिर्फ नई नौकरियां पैदा होना नहीं है. बल्कि, जीएसटी लागू होने की वजह से कानून में आया बदलाव भी है. जीएसटी की वजह से जो कारोबार असंगठित क्षेत्र के दायरे से निकलकर संगठित क्षेत्र का हिस्सा बना है, उसे नियमों का पालन करते हुए अपने कर्मचारियों को ईपीएफओ में रजिस्टर कराना जरूरी हो गया है. ऐसे में लोग निजी कंपनियों के ईपीएफओ से निकलकर राजकीय ईपीएफओ का हिस्सा बन रहे हैं. या फिर बहुत से कर्मचारी तो पहली बार ईपीएफओ का हिस्सा बने हैं. इनमें से बहुत से ऐसे हैं, जो नौकरी तो पहले से कर रहे थे. पर, ईपीएफओ में उनका रजिस्ट्रेशन पहली बार हुआ है. आंकड़े और भी विवादास्पद तमाम सैंपल सर्वे की बात करें, तो एनएसएसओ यानी राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण संगठन के आंकड़े ज्यादा प्रामाणिक होते हैं. लेकिन एनएसएसओ के आंकड़े और भी विवादास्पद हो गए हैं और इसी वजह से वो सार्वजनिक नहीं किए गए. क्योंकि उन्हें स्वीकारना सियासी तौर पर काफी मुश्किल है. आंकड़े सार्वजनिक न किए जाने से नाखुश कई अर्थशास्त्रियों ने राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग से इस्तीफा दे दिया था. इस विवाद के बीच बिजनेस स्टैंडर्ड ने एनएसएसओ के जो आंकड़े हासिल किए हैं और जिनका यहां जिक्र किया है, वो बहुत अहम हो जाते हैं. इन आंकड़ों से ये बात सामने आई है कि 2017-18 में बेरोजगारी की दर आजाद भारत के इतिहास में सबसे ज्यादा यानी 6.1 प्रतिशत थी. बिजनेस स्टैंडर्ड ने अपनी रिपोर्ट में पुरुष और महिला युवाओं की बेरोजगारी के आंकड़ों पर जोर दिया है. ये आंकड़े शहरी इलाकों के भी हैं और ग्रामीण क्षेत्र के भी. ये आंकड़े बहुत डराने वाले हैं. ऐसे में इन पर विस्तार से चर्चा जरूरी है. रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण और शहरी इलाकों में पुरुष युवाओं के बीच बेरोजगारी की दर 17.4 और 18.7 प्रतिशत थी. वहीं युवतियों की बात करें तो 2017-18 में ग्रामीण क्षेत्र में उनकी बेरोजगारी की दर 13.6 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 27.3 फीसद थी. इन आंकड़ों से बहुत परेशानी खड़ी होती है. वो इसलिए और भी क्योंकि आज देश में डेमोग्राफिक डिविडेंड यानी ज्यादा आबादी के फायदों की बड़ी बातें होती हैं. इन्हें भविष्य की पूंजी बताया जाता है. कुछ लोगों की राय ये थी कि अगर रोजगार नहीं पैदा होते तो ये आबादी देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ बन जाएगी. फिर बेरोजगारी एक सामाजिक समस्या बन जाएगी. ताजा आंकड़े इसी तरफ इशारा करते हैं. बेरोजगारी के आंकड़े बढ़ने की वजहें बेरोजगारी के आंकड़े बढ़ने की कई वजहें हैं. पहली बात तो ये कि आज की तारीख में खेती में किसी की दिलचस्पी नहीं रह गई है. इसकी वजह मॉनसून की उठा-पटक और अनिश्चितता तो है ही, सरकार की नीतियां भी जिम्मेदार हैं. खराब मॉनसून होने का नतीजा होता है कि फसलें खराब होती हैं. इससे उपज कम होती है और किसानों की आमदनी कम होती है. वो कर्ज के फेर में फंस जाता है. इसी वजह से किसानों की खुदकुशी के मामले बढ़ते हैं. अच्छी फसल होने पर फसलों की कीमतें गिर जाती हैं. न्यूनतम समर्थन मूल्य भी बेअसर हो जाता है. अच्छी फसल होने के बावजूद किसानों की आमदनी घट जाती है. वही समस्या फिर से खड़ी होती है. इसलिए किसानों के बच्चे खेती करने के बजाय शहरी इलाकों में जाकर रोजगार तलाशते हैं. तो, पहले जहां कम काश्त यानी खेती की जमीन पर ज्यादा लोग काम करते थे. इसे अर्थशास्त्री छुपी हुई बेरोजगारी कहते थे. मगर अब ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं के रोजगार की तलाश में शहर आने से ये छुपी हुई बेरोजगारी खुल कर बेरोजगारी के दायरे में आ गई है. यह भी पढ़ें: NITI आयोग ने दी सफाई, कहा- 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाली रिपोर्ट सत्यापित नहीं दूसरी वजह ये है कि जीएसटी लागू होने के बाद से छोटे और मध्यम दर्जे के कारोबारी सेक्टर में बहुत उठा-पटक देखी जा रही है. इस सेक्टर में कामकाजी लोगों की सबसे ज्यादा मांग हुआ करती थी. खास तौर से ग्रामीण क्षेत्र में तो ये सेक्टर रोजगार देने का बड़ा जरिया था. लेकिन, अब प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी की वजह से स्व-रोजगार करने वाले बहुत से लोग परेशान हैं. जीएसटी को नोटबंदी के बाद कुछ महीनों के भीतर लागू कर दिया गया था. इसके नतीजे में सूक्ष्म और मध्यम दर्जे के कारोबार पर सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ा है. उनका धंधा मंदा पड़ गया है. बेरोजगारी बढ़ने की तीसरी वजह रियल स्टेट सेक्टर में आई मंदी है. पहले ग्रामीण इलाकों से पलायन कर के शहरी क्षेत्र में आने वालों को रियल एस्टेट सेक्टर में होने वाले निर्माण कार्य की वजह के काम मिल जाता था. पहले ये प्रक्रिया लगातार चल रही थी. लेकिन 2017-18 में रेरा कानून लागू किया गया. ऐसा नोटबंदी के फौरन बाद किया गया था. नोटबंदी की वजह से रियल एस्टेट सेक्टर पहले ही परेशान था. उस पर रेरा कानून लागू हुआ, तो रियल एस्टेट सेक्टर में और मंदी आ गई. कारोबारी और महंगे रिहाइशी मकानों वाले कई प्रोजेक्ट ठप पड़ गए. इससे भी तरक्की में काफी कमी आई. इसके बाद निजी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास की रफ्तार धीमी पड़ी. नतीजा ये कि इससे भी रोजगार के मौके कम हो गए. बेहतर भविष्य की उम्मीद में ग्रामीण क्षेत्र से पलायन कर के आने वाले वालों के पास अब शहर में भी रोजगार नहीं था. चौथी वजह ये कि आज के युवा की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं. वो अच्छी डिग्री हासिल करने के बाद कम हुनर वाले काम करने को तैयार नहीं हैं. अब अर्थव्यवस्था पिछले तीन साल से अपेक्षा के मुताबिक 8 प्रतिशत सालाना की दर से तो बढ़ नहीं रही है. इसका नतीजा ये हुआ है कि हुनरमंद कामगारों जैसे इंजीनियरों, मैनेजमेंट ग्रैजुएट और दूसरे पेशेवर लोगों की मांग घट रही है. इससे रोजगार हासिल करने के लिए जरूरी बेसिक डिग्री बेकार हो गई है. वहीं स्थानीय कानून ये सुनिश्चित करते हैं कि सुपर मार्केट में रोजगार के मौके उपलब्ध हैं. वहीं गांवों से शहर आकर ई-कॉमर्स से जुड़ने वाले कामगार इस के दायरे में आते ही नहीं. कर्मचारियों की छंटनी  ऐसे में अब ये बात चौंकाने वाली नहीं लगती कि छोटी-मोटी नौकरियों के लिए ग्रेजुएट ही नहीं, इंजीनियरिंग और एमबीए की पढ़ाई करने वाले भी अर्जियां दे रहे हैं. ऐसा रेलवे और दूसरी छोटी सरकारी नौकरियों के साथ भी हो रहा है. हकीकत ये है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होने की वजह से नौकरियां हैं ही नहीं. साथ की सख्त श्रमिक कानूनों की वजह से आज कंपनियां इंसानों को नौकरी पर रखने के बजाय नई तकनीक के इस्तेमाल पर ज्यादा जोर दे रही हैं. अब जिस देश में बेरोजगारी का स्तर इतना ज्यादा हो, वहां तो ऐसा ही होगा. ऐसे में जब धंधा मंदा होता है, तो कंपनियो को अपने कर्मचारियों की छंटनी की चुनौती से नहीं जूझना होता. वो तकनीक की मदद से मुश्किल वक्त से पार पाती हैं. हमें अपने देश में शिक्षा के स्तर को भी सुधारना होगा. आज सरकार स्कूलों या उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों का रजिस्ट्रेशन बढ़ने का श्रेय भले ही लूटती हो, सार्वजनिक क्षेत्र में शिक्षा का स्तर बहुत ही खराब है. इस व्यवस्था में पढ़ने वाले छात्रों के लिए मुश्किल होती है. खास तौर से जो छात्र क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़कर आते हैं, उनके लिए या तो स्वरोजगार का विकल्प बचता है या फिर सरकारी नौकरी. सरकार खुद ही अपने कर्मचारियों की तादाद घटाती जा रही है. यानी भविष्य में बेरोजगार लोगों की बढ़ती तादाद के लिए सरकारी क्षेत्र में नौकरियों की वैसे भी कमी ही होगी. कुल मिलाकर, देश में बेरोजगारी की समस्या बहुत भयंकर है. इससे निपटने का एक ही तरीका है कि अर्थव्यवस्था के विकास की रफ्तार को बढ़ाया जाए. और ये काम धीरे-धीरे ही हो सकता है. ये लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक तमाम युवा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन जाते. ये ही असल हालात हैं और हमें इनका सामना करना चाहिए. इस तल्ख हकीकत को स्वीकार करना चाहिए.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2FYPxCt

13 Point roster system: केंद्र सरकार की नींद हराम करने के लिए काफी है!

13 Point roster system: केंद्र सरकार की नींद हराम करने के लिए काफी है!
आरक्षण को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार विवाद बना हुआ है और विपक्ष इसे लेकर सरकार पर हमलावर बनी हुई है. आर्थिक रूप से गरीब ‘सवर्णों’ को 10% आरक्षण देने का विवाद अभी थमा ही नहीं था कि आरक्षण से जुड़ा एक नया विवाद शुरू हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्रीय विश्वविद्यालयों और इससे संबद्ध कॉलेजों और संस्थानों में शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति हेतु 200 रोस्टर प्वाइंट को खारिज करके 13 प्वाइंट रोस्टर को लागू करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को पलटने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर स्पेशल लीव पिटीशन को 22 जनवरी को खारिज कर दिया. इसके बाद कई राजनीतिक पार्टियों, शिक्षक और छात्र संगठनों और कई समाजसेवी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलटने के लिए केंद्र सरकार से अध्यादेश जारी करने की मांग की है. क्या है मांग? इन संगठनों की मांग है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों में शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति के लिए 200 प्वाइंट रोस्टर को ही लागू किया जाए. इन संगठनों का कहना है कि 13 प्वाइंट रोस्टर के लागू हो जाने से विश्वविद्यालयों में OBC, SC, ST और दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित शैक्षणिक पदों में भारी कमी आ जाएगी. 13 प्वाइंट रोस्टर का विरोध करने के लिए कई बुद्धिजीवियों और प्रोफेसरों ने मिलकर ‘ज्वॉइंट फोरम फ़ॉर एकेडमिक एंड सोशल जस्टिस’ नामक एक साझा मंच बनाया है ताकि इसका विरोध करने वाले संगठनों को एकजुट किया जाए. इस फोरम ने 13 प्वाइंट रोस्टर को खारिज करने और 200 प्वाइंट रोस्टर को फिर से लागू करने के लिए गुरुवार को दिल्ली में मंडी हाउस से संसद मार्ग तक एक मार्च भी निकाला. इस मार्च के बाद एक सभा भी हुई जिसमें RJD के तेजस्वी यादव, SP के धर्मेंद्र यादव, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, गुजरात के विधायक और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी, लेफ्ट पार्टियों से सीताराम येचुरी, डी. राजा और कविता कृष्णन, आरएलएसपी के नेता उपेंद्र कुशवाहा, छात्र नेता उमर खालिद, भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’, पूर्व सांसद अली अनवर समेत कई नामचीन नेताओं ने शिरकत की. फोरम के केंद्रीय समिति के सदस्य और श्यामलाल कॉलेज में इतिहास के अस्सिटेंट प्रोफेसर जितेंद्र मीणा ने बताया कि दिल्ली में मार्च के साथ-साथ देशभर में गुरुवार को लगभग 100 जगहों पर 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम के खिलाफ धरना-प्रदर्शन हुए और इस आंदोलन का करीब 80 संगठनों ने समर्थन किया है.   क्या है यह 200 और 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम? सवाल यह है कि आखिर यह 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम है क्या जिसे लेकर विपक्ष गोलबंद हो रहा है. और एससी, एसटी, ओबीसी और दिव्यांग श्रेणी के लोगों में गुस्सा है. दरअसल यह 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम विभागवार आरक्षण है. इसमें पूरे विश्वविद्यालय या कॉलेज या संस्थान को एक यूनिट न मानकर विभाग को एक यूनिट मानने की सिफारिश की गई है. जबकि 200 रोस्टर प्वाइंट में पूरे विश्वविद्यालय या कॉलेज या संस्थान को एक यूनिट माना जाता था. 2006 से इसी पद्धति से एससी, एसटी, ओबीसी और दिव्यांग श्रेणी को शैक्षणिक पदों पर आरक्षण दिया जा रहा था. अभी ओबीसी के लिए 27 फीसदी, एससी के लिए 15 फीसदी और एसटी के लिए 7.5 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है. क्योंकि एसटी को 7.5 फीसदी आरक्षण दिया जाता है तो इस हिसाब से 100 पदों में एसटी के लिए 7.5 पद बनते. क्योंकि 0.5 कोई पद हो नहीं सकता तो 7.5 की जगह अगर अगर 100 में इसे 8 पद किया जाता तो यह 50 फीसदी की आरक्षण की अधिकतम सीमा से ऊपर हो जाता और 7 पद करने पर एसटी को संवैधानिक रूप से दिए गए आरक्षण की सीमा का उल्लंघन होता. इसलिए इस 0.5 की समस्या को खत्म करने के लिए 200 प्वाइंट रोस्टर प्वाइंट की व्यवस्था की गई ताकि 200 पदों में से एसटी के लिए 15 आरक्षित पद बन सके जो 200 का 7.5 फीसदी है. ऐसे कम होंगे आरक्षित पद? अब चूंकि किसी भी विश्वविद्यालय या संस्थान में एक साथ 200 पद सामान्यतः विज्ञापित नहीं होते हैं तो सभी वर्गों को 200 रोस्टर प्वाइंट से आरक्षण देने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा विज्ञापित हर चौथी सीट ओबीसी को, सातवीं सीट एससी को और फिर 14वीं सीट एसटी, 15वीं सीट एससी और 16वीं सीट ओबीसी को दी जाती थी. यह क्रम विश्वविद्यालय द्वारा 200 पदों के विज्ञापित होने तक चलता था और 200 पदों के बाद फिर यही क्रम दोहराया जाता था. इसे और आसान भाषा में ऐसे समझा जा सकता है कि अगर किसी नए बने संस्थान या विश्वविद्यालय में अगर 200 रोस्टर प्वांइट से 16 सीट विज्ञापित होते हैं तो इसका चौथा, 8वां, 12वां और 16वां सीट ओबीसी के लिए आरक्षित होगा, 7वां और 15वां एससी के लिए और 14 वां सीट एसटी के लिए. लेकिन अगर यही 16 पद विषय विभागवार यानी 13 प्वाइंट रोस्टर से विज्ञापित होते हैं तो तस्वीर बिल्कुल बदल जाएगी. आइए समझते हैं कैसे? विभागवार रोस्टर में चौथा, 8वां और 12 वां पद OBC के लिए आरक्षित होगा और 7वां पद एससी के लिए. 13 प्वाइंट रोस्टर होने की वजह से एसटी को आरक्षण विभाग के पहले 13 विज्ञापित पदों में नहीं मिलेगा. मान लिया जाए इन 16 पदों में 6 पद हिन्दी विभाग से, 3 पद इतिहास विभाग से, 3 पद जीवविज्ञान विभाग से, 2 पद भूगोल विभाग से और 2 पद गणित विभाग से विज्ञापित होते हैं तो सिर्फ हिन्दी में विज्ञापित 5वां पद ही ओबीसी के लिए आरक्षित होगा. बाकी अन्य सभी पद सामान्य श्रेणी की होंगी क्योंकि विभाग को यूनिट माना गया है. इस आधार पर विभाग का 7वां पद एससी के लिए आरक्षित होगा जबकि चौथा, 8वां और 12वां पद ओबीसी के लिए. इसमें एसटी को कोई आरक्षण नहीं मिलेगा. यानी 200 रोस्टर प्वाइंट से जहां 16 में से 4 ओबीसी, 1 एससी और 1 एसटी के लिए यानी कुल 6 पद आरक्षित थे, वहीं 13 प्वाइंट रोस्टर में सिर्फ 1 पद ही ओबीसी के लिए आरक्षित होगा और बाकी सभी सामान्य श्रेणी की होंगी. और जिन्हें विश्वविद्यालयों का हाल पता है वो जानते हैं कि सामान्य पदों पर ओबीसी, एससी और एसटी समुदाय से आने वाले कितने लोगों की नियुक्तियां होती हैं. हाल में आए आंकड़ों ने यह साबित भी किया है कि इन वर्गों की विश्वविद्यालयों समेत लगभग सभी जगहों पर तय आरक्षण से काफी कम है. विश्वविद्यालयों में तो यह न के बराबर है. एसटी और दिव्यांग श्रेणी को होगा सबसे बड़ा नुकसान 13 प्वाइंट रोस्टर के हिसाब से किसी विभाग में एसटी को 26वें पद पर आरक्षण मिलेगा और अमूनन इतने बड़े विभाग होते नहीं हैं. और छोटे विभाग में 26वां क्रम आने में काफी वक्त लगेगा. इस क्रम को इस तस्वीर से समझा जा सकता है. 13 प्वाइंट रोस्टर की एक बड़ी खामी यह भी है कि इसमें दिव्यांग श्रेणी को अलग-अलग श्रेणियों (OBC, SC, ST और सामान्य) के तहत कुल 3 फीसदी दिए जाने वाले आरक्षण पर भी अस्पष्टता है. 200 प्वाइंट रोस्टर में हर 34वां विज्ञापित पद दिव्यांग श्रेणी को जाता था और दिव्यांगों में भी अलग-अलग श्रेणियों का जिक्र होता था. 13 प्वाइंट रोस्टर में यह आरक्षण देना लगभग नामुमकिन होगा. यही वजह है कि पूरे देश में इसका जमकर विरोध हो रहा है और केंद्र सरकार द्वारा इस मुद्दे पर अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को बदलने की मांग की जा रही है. केंद्र सरकार और यूजीसी ने भले ही 13 प्वाइंट रोस्टर को लागू करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ एसएलपी दाखिल की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान मौजूद और जेएनयू के प्रोफेसर राजेश पासवान का कहना है कि केंद्र सरकार और UGC के वकील ने 200 रोस्टर प्वाइंट के पक्ष में ठीक से तर्कों को नहीं रखा. सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील को रोस्टर के बारे में सही से पता भी नहीं था. इस वजह से यह एसएलपी सुप्रीम कोर्ट खारिज हुई या सरकार ने छिपे तौर से खारिज होने दिया. मुमकिन है कि आंकड़ों की जाल में उलझा 13 प्वाइंट रोस्टर बहुत लोगों को समझ में नहीं आ रहा हो लेकिन इतने सारे संगठनों के एकजुट होने से देश के वंचित तबकों के एक बड़े हिस्से में यह संदेश गया है कि उनके वर्ग के लोगों की विश्वविद्यालयों में हिस्सेदारी घटेगी. आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को दिए गए10 फीसदी आरक्षण पर जिस विपक्ष के एक बड़े तबके ने चुप्पी साध ली थी. उस विपक्ष को इस 13 प्वाइंट रोस्टर ने एक नया हथियार दिया है और सामाजिक न्याय के नाम पर एक नई गोलबंदी की राह खुल गई है. आगामी बजट सत्र में यह मुद्दा हावी हो सकता है. केंद्र सरकार पर जहां अध्यादेश लाने का दबाव होगा वहीं 13 प्वाइंट रोस्टर का विरोध कर रहे लोगों की विपक्ष पर भी निगाह होगी कि वो इस मुद्दे को कितने जोरशोर से उठाते हैं.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2SmxawS

NITI आयोग ने दी सफाई, कहा- 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाली रिपोर्ट सत्यापित नहीं

NITI आयोग ने दी सफाई, कहा- 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाली रिपोर्ट सत्यापित नहीं
राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) की रिपोर्ट में पता चला है कि मौजूदा बेरोजगारी दर पिछले 45 सालों में सबसे अधिक है. एनएसएसओ ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि साल 2017-18 में यह दर 6.1 फीसदी है. हालांकि नीति आयोग के जरिए इस रिपोर्ट पर कहा गया है कि यह सत्यापित नहीं है. एनएसएसओ की रिपोर्ट बताती है कि देश में बेरोजगारी दर चार सालो के उच्च स्तर पर पहुंच गई है. जिसको लेकर NITI अयोग ने दावा किया कि डेटा 'सत्यापित नहीं था' क्योंकि NSSO की रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाना बाकी था. NITI अयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने लीक हुई NSSO रिपोर्ट को खारिज करने का प्रयास किया और कहा कि 2010-11 से इकट्ठा किए गए बेरोजगारी के आंकड़ों के लिए संख्या तुलनीय नहीं थी. ऐसा इसलिए क्योंकि सैंपल साइज और सर्वे की कार्यप्रणाली अलग थी. NITI Aayog Vice Chairman Rajiv Kumar: Data collection method is different now, we are using a computer assisted personal interviewee in the new survey. It is not right to compare the two data sets, this data is not verified. It is not correct to use this report as final. pic.twitter.com/AVUuD0wYDZ — ANI (@ANI) January 31, 2019 राजीव कुमार ने कहा 'मैं स्पष्ट रूप से बताना चाहता हूं कि रिपोर्ट को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है. यह सिर्फ एक मसौदा रिपोर्ट है. डेटा (समाचार रिपोर्टों में) को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है और सरकार के जरिए अनुमोदित नहीं है. इसलिए इसका इस्तेमाल करना सही बात नहीं है.' उन्होंने कहा कि लीक मसौदा रिपोर्ट भ्रम पैदा कर रही थी. एनएसएसओ की रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक डोमेन में नहीं डाला गया है. इसका कारण बताते हुए कुमार ने कहा कि ऐसा इसलिए था क्योंकि जुलाई से सितंबर 2017 की तिमाही के आधारभूत आंकड़ों को जुलाई से सितंबर 2018 तिमाही के आंकड़ों के साथ क्रॉसचेक किए जाने के बाद ही सत्यापित किया जा सकता था, जो कि एनएसएसओ की रिपोर्ट का हिस्सा नहीं था. कुमार के मुताबिक, एनएसएसओ की रिपोर्ट को अंतिम मान लेना गलत है. इसे दूसरे दौर में एकत्रित आंकड़ों से सत्यापित किया जाना चाहिए.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2G0IuZW

मुंबई: 11 साल का बच्चा PUBG पर लगवाना चाहता है बैन, हाईकोर्ट में मां के जरिए की अपील

मुंबई: 11 साल का बच्चा PUBG पर लगवाना चाहता है बैन, हाईकोर्ट में मां के जरिए की अपील
मोबाइल गेम पबजी को लेकर विरोध बढ़ता ही जा रहा है. इस पर बैन लगाने के लिए एक 11 साल का बच्चा गुरुवार को बंबई हाईकोर्ट पहुंच गया और उसने कहा कि यह गेम हिंसा, हमला और साइबर बुलिंग को बढ़ावा देता है. टीओआई के मुताबिक बच्चे का नाम अहद निजाम है और उसने अपनी मां के जरिए बंबई हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. निजाम ने कहा कि कोर्ट को पबजी पर बैन लगाना चाहिए और महाराष्ट्र सरकार को इस संबंध में निर्देश देना चाहिए. निजाम की मां के वकील तनवीर निजाम ने बताया, याचिका में यह मांग भी की गई है कि एक ऑनलाइन आचार समीक्षा समिति गठित करने के लिए केंद्र को निर्देश दिया जाए. अब इस मामले की सुनवाई एनएच पाटिल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के सामने हो सकती है. गौरतलब है कि PubG गेम दिसंबर 2017 में लॉन्च हुआ था, जिसके बाद से कई लोग इस गेम के फैन हो गए थे. ये गेम बच्चों से लेकर युवाओं में काफी फेमस है. हाल ही में जम्मू कश्मीर में इस गेम को बैन करने की मांग भी उठी थी. तब बताया गया था कि इस गेम की वजह से बच्चों के रिजल्ट पर काफी बुरा असर पड़ता है. परीक्षा में चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने भी एक स्टूडेंट की मां के सवाल के जवाब में इस गेम का जिक्र किया था. चर्चा के दौरान एक बच्चे की मां ने पीएम मोदी को बताया था कि ऑनलाइन गेम्स की वजह से उनका बच्चा पढ़ाई से दूर हो रहा है. तब पीएम मोदी ने बड़े ही मजेदार तरीके से पूछा, ' Pub-G वाला है क्या?' पीएम मोदी के सवाल पर वहां मौजूद सभी लोग खिलखिला उठे थे. ये भी पढ़ें: हरियाणा में बीजेपी को संजीवनी, JJP का उदय, कांग्रेस को नया सोचने की जरूरत ये भी पढ़ें: 'हिट एंड रन पॉलिटिक्स' जब केजरीवाल छोड़ चुके हैं तो राहुल इसे क्यों शुरू कर रहे हैं?

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2G1Cujv

Budget 2019: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के दौरान 147 बार तालियों से गुंजा सेंट्रल हॉल

Budget 2019: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के दौरान 147 बार तालियों से गुंजा सेंट्रल हॉल
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में हिन्दी में अभिभाषण दिया. इस दौरान सेंट्रल हॉल 147 बार सदस्यों की मेज की थपथपाहट और तालियों से गूंजा. उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के पहले और अंतिम पैरे का अंग्रेजी अंश पढ़ा. बजट सत्र की शुरुआत पर संसद के सेंट्रल हॉल में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति कोविंद के अभिभाषण में जब रक्षा तैयारियों के संदर्भ में राफेल विमान खरीद सौदे का जिक्र आया तब करीब 40 सेकेंड तक तालियां बजी. इसके अलावा सर्जिकल स्ट्राइक, वन रैंक वन पेंशन, राष्ट्रीय पुलिस स्मारक संबंधी उल्लेख पर भी सदस्यों ने तालियां बजाई. नोटबंदी, जीएसटी, मुद्रा योजना में महिला उद्यमियों को लोन देने, किसानों का उल्लेख, गंगा की स्वच्छता, भारत रत्न संबंधी उल्लेख और उज्ज्वला योजना का जिक्र होने के समय भी सदस्यों ने तालियां बजाई. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भाषण के दौरान 142 बार तालियां बजी, वहीं उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के अभिभाषण का कुछ अंश अंग्रेजी में पढ़े जाने के दौरान पांच बार तालियां बजी. सेंट्रल हॉल में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और डॉ. मनमोहन सिंह, बीजेपी के वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवाणी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पहली पंक्ति में मौजूद थे. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ गृह मंत्री राजनाथ सिंह और गुलाम नबी आजाद बैठे थे. वहीं अभिभाषण के दौरान कमरे में केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी, स्मृति ईरानी भी मौजूद थे. इस दौरान समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव, बीजेडी नेता भतृहरि माहताब, तृणमूल नेता सुदीप बंदोपाध्याय भी मौजूद थे. अभिभाषण समाप्त होने के बाद कोविंद ने अगली पंक्ति में बैठे हुए सभी नेताओं के पास जाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया. उपलब्धियों का उल्लेख कोविंद ने बजट सत्र के पहले दिन संसद के सेंट्रल हॉल में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में अपने अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सरकार ने नया भारत बनाने का संकल्प लिया है. उन्होंने राफेल सौदे का उल्लेख करते हुए कहा, 'दशकों के अंतराल के बाद भारतीय वायुसेना, आने वाले महीनों में नई पीढ़ी के अति आधुनिक लड़ाकू विमान-राफेल को शामिल करके अपनी शक्ति को और सुदृढ़ करने जा रही है.' राष्ट्रपति के करीब एक घंटे तक चले अभिभाषण में सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण, तीन तलाक विधेयक, नागरिकता विधेयक आदि का भी उल्लेख आया. अभिभाषण के दौरान उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विभिन्न केन्द्रीय मंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, विभिन्न दलों के नेता और सांसद मौजूद थे. अस्थिरता का दौर कोविंद ने कहा, 'देश 2014 लोकसभा चुनावों से पहले अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था, लेकिन चुनाव के बाद मेरी सरकार ने नया भारत बनाने का संकल्प लिया. पिछले साढ़े चार साल में मेरी सरकार ने लोगों को नई आशा और विश्वास दिया है और देश का सम्मान बढ़ाया है.' राष्ट्रपति ने कहा, 'मेरी सरकार सभी वर्गों के लोगों की आशाओं, आकांक्षाओं को पूरा करने का काम कर रही है.' सर्जिकल स्ट्राइक का उल्लेख करते हुए कोविंद ने कहा, 'विश्व पटल पर जहां एक ओर भारत, हर देश के साथ मधुर संबंध का हिमायती है. वहीं हर पल हमें हर चुनौती से निपटने के लिए खुद को सशक्त भी करते रहना है. बदलते हुए भारत ने सीमा पार आतंकियों के ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करके अपनी ‘नई नीति और नई रीति’ का परिचय दिया है.' अभिभाषण के दौरान राष्ट्रपति ने महात्मा गांधी, बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर, राम मनोहर लोहिया का उल्लेख किया. राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत नौ करोड़ से ज्यादा शौचालयों का निर्माण हुआ है. इस जन आंदोलन के कारण आज ग्रामीण स्वच्छता का दायरा बढ़कर 98 प्रतिशत हो गया है, जो कि साल 2014 में 40 प्रतिशत से भी कम था. उन्होंने कहा कि सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत अब तक 6 करोड़ से ज्यादा गैस कनेक्शन दिए हैं. राष्ट्रपति ने कहा, 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य अभियान’ के तहत देश के 50 करोड़ गरीबों के लिए गंभीर बीमारी की स्थिति में, हर परिवार पर हर साल 5 लाख रुपए तक के इलाज खर्च की व्यवस्था का भी उल्लेख किया. उन्होंने जन औषधि केन्द्रों के जरिए 700 से ज्यादा दवाइयां बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराए जाने का भी उल्लेख किया. उन्होंने ‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना’, ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ के माध्यम से लोगों को बीमा सुरक्षा कवच प्रदान किये जाने का भी जिक्र किया. कोव़िंद ने तमिलनाडु के मदुरै से लेकर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा तक और गुजरात के राजकोट से लेकर असम के कामरूप तक, नए एम्स का निर्माण किए जाने और शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक बदलाव लाने की सरकार की पहल का भी जिक्र किया.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2G1ni6i

CBI के Ex बॉस आलोक वर्मा का इस्तीफा नामंजूर, वर्मा पर कार्रवाई की तैयारी

CBI के Ex बॉस आलोक वर्मा का इस्तीफा नामंजूर, वर्मा पर कार्रवाई की तैयारी
सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर आलोक वर्मा के खिलाफ गृह मंत्रालय ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है. माना जा रहा है कि वर्मा को पूर्व डायेक्टर के पद से हटा देने के बाद बतौर फायर एंड सेफ्टी के डीजी पद पर नहीं लौटने से गृह मंत्रालय नाराज है. वर्मा को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली कमेटी ने सीबीआई डायरेक्टर पद से हटाकर फायर एंड सेफ्टी का डीजी बना दिया था, लेकिन वर्मा ने इस जिम्मेदारी से इस्तीफा दे दिया. एनडीटीवी के अनुसार इधर सरकार वर्मा का इस्तीफा स्वीकार करने को तैयार नहीं है. ऐसे में गृहमंत्रालय जल्द ही कोई कार्रवाई कर सकती है. गृह मंत्रालय चाहता है कि वर्मा अपना नया दफ्तर ज्वाइन कर लें और रिटायरमेंट के आखिरी दिन ऑफिस आएं. गृह मंत्रालय की ओर से वर्मा को उनका कार्यकाल खत्म होने से एक दिन पहले खत भेजा गया है. इसमें कहा गया है कि आप डीजी, फायर सर्विसेस, सिविल डिफेंस एंड होम गार्ड्स का पदभार तुरंत संभाल लें. गृह मंत्रालय की ओर से ये खत इसलिए जारी किया गया है, क्योंकि वर्मा ने 11 जनवरी को सीबीआई डायरेक्टर के पद से इस्तीफा देने के बाद खुद को सेवा निवृत ही समझने को कहा था. क्या है पूरा मामला? केंद्र सरकार ने 23 अक्टूबर 2018 को देर रात आदेश जारी कर वर्मा के अधिकार वापस ले लिए थे और उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर से उन्हें बड़ी राहत मिली थी. कोर्ट ने सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था, जिसके बाद वर्मा ने 77 दिन बाद अपना कार्यभार संभाला था. हालांकि वो इसके बाद भी सीबीआई डायरेक्टर के पद पर नहीं टिक सके. क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई हाई पावर तीन सदस्यीय चयन समिति की बैठक में 2:1 के बहुमत से उन्हें सीबीआई प्रमुख के पद से हटा दिया गया था. आपको बता दें कि आलोक वर्मा को हटाया नहीं गया था बल्कि उनका ट्रांसफर किया गया था. चयन समिति ने आलोक वर्मा की डायरेक्टर, सीबीआई की पोस्ट से डायरेक्टर जनरल, फायर सर्विस- सिविल डिफेंस एंड होम गार्ड के पद पर ट्रांसफर को मंजूरी दी थी. सुप्रीम कोर्ट के वकील और पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ अशोक धमीजा ने कहा था कि आलोक वर्मा का सीबीआई डायरेक्टर के पद से ट्रांसफर हुआ है. DSPE एक्ट के S. 4-B के हिसाब से भी इसे ट्रांसफर ही कहा जाएगा न कि पद से हटाए जाना. अधिकारियों को उनके ट्रांसफर से पहले अपने बचाव का मौका तक नहीं दिया जा रहा है और S. 4-B के तहत भी उन्हें बचाव का अधिकार नहीं मिलता है. वर्मा का ट्रांसफर सीवीसी रिपोर्ट को देखते हुए हुआ था.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2G1ow1j

CBSE ने 10th और 12th के एडमिट कार्ड जारी किए, cbse.nic.in पर ऐसे करें डाउनलोड

CBSE ने 10th और 12th के एडमिट कार्ड जारी किए, cbse.nic.in पर ऐसे करें डाउनलोड
CBSE ने दसवीं और बारहवीं कक्षा के छात्रों का एडमिट कार्ड जारी कर दिया है. एडमिट कार्ड CBSE की आधिकारिक वेबसाइट cbse.nic.in पर जारी किए गए हैं. ऐसे में सीबीएसई बोर्ड से पढ़ रहे छात्र अपना एडमिट कार्ड यहां से डाउनलोड कर सकते हैं. छात्रों को ये एडमिट कार्ड अपने अपने स्कूल से लेना होगा. स्कूल अपने यूजर ID और पासवर्ड से इन प्रवेश पत्रों को डाउनलोड कर सकेंगे. CBSE ने रेगुलर छात्रों के साथ प्राइवेट स्टूडेंट्स के एडमिट कार्ड भी जारी कर दिए हैं. एडमिट कार्ड लेते वक्त छात्र कुछ चीजों पर विशेष रूप से ध्यान रखें- . एडमिट कार्ड लेने स्कूल जाएं तो अपने प्रिंसपल का साइन जरूर ले लें. . कार्ड पर स्टूडेंट का साइन होना भी जरूरी है . कार्ड पर अपना नाम, पिता का नाम सही से देखें और उनकी स्पेलिंग चेक करें. . अपने एग्जाम सब्जेक्ट और अपनी फोटो को ठीक तरह से चेक कर लें. CBSE नोटिफिकेशन के मुताबिक एग्जाम सेंटर में रिपोर्टिंग टाइम सुबह 10 बजे होगा. एडमिट कार्ड के बिना किसी भी स्टूडेंट को एग्जाम हॉल में एंट्री नहीं मिलेगी.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2G16vQI

दिल्ली AIIMS आ रहे हैं मनोहर पर्रिकर, बजट सत्र की वजह से अटका था चेकअप

दिल्ली AIIMS आ रहे हैं मनोहर पर्रिकर, बजट सत्र की वजह से अटका था चेकअप
गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अपने रेगुलर चेकअप के लिए राजधानी आने वाले हैं. पर्रिकर को चेकअप कराना था लेकिन वो अटल सेतु के उद्घाटन और गोवा विधानसभा के बजट सत्र के चलते अटका हुआ था. लेकिन अब वो दिल्ली आ रहे हैं. Goa CMO: Chief Minister Manohar Parrikar will be travelling to New Delhi later today, for undergoing his medical review/checkup which was pending due to the inauguration of Atal Setu and State Legislative Assembly session (file pic) pic.twitter.com/DF0nJmoSe7 — ANI (@ANI) January 31, 2019 बीमार चल रहे पर्रिकर अपनी रेगुलर जांच के सिलसिले में गुरुवार को नई दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे. मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी. जानकारी है कि पर्रिकर (63) को पैंक्रियाटिक कैंसर है और पिछले साल एम्स से छुट्टी मिलने के बाद 14 अक्टूबर से वह यहां पास में डोना पाउला स्थित अपने निजी आवास पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं. अधिकारी ने बताया, ‘मुख्यमंत्री अपने नियमित जांच के लिए शाम में दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे. अगले चार दिन तक उनके एम्स में भर्ती रहने की संभावना है.’ उन्होंने बताया कि राज्य विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार शाम को खत्म होने के बाद पर्रिकर दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे. मुख्यमंत्री ने बुधवार को विधानसभा में अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे ही बजट पेश किया. उनकी नाक में एक नली लगी हुई थी. विधानसभा में उन्होंने कहा, ‘मैं यह बजट ‘जोश’ के साथ पेश कर रहा हूं. ‘जोश’ बहुत-बहुत ऊंचा है और पूरे ‘होश’ में हूं.’ एम्स से छुट्टी मिलने के बाद पर्रिकर कुछ ही सार्वजनिक मौकों पर नजर आए हैं. मुख्यमंत्री का 2018 में गोवा, मुंबई, नई दिल्ली और अमेरिका के अस्पतालों में इलाज हो चुका है. पिछले सप्ताह उन्होंने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक की अध्यक्षता की थी.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2ToWtvI

सबरीमाला पुर्नविचार याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सबरीमाला पुर्नविचार याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सबरीमाला पुर्नविचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई करने वाली है. सितंबर में सबरीमाला मु्द्दे पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अब तक लगभग 48 याचिकाएं दायर की गई हैं. Supreme Court to hear on February 6 the review petitions filed against verdict allowing entry of women of all age groups into the #Sabarimala temple. #Kerala pic.twitter.com/1RPmUTOrnF — ANI (@ANI) January 31, 2019 प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ 6 फरवरी से याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगी. मामले की सुनवाई पहले 22 जनवरी को निर्धारित की गई थी, लेकिन इसे रद्द करना पड़ा क्योंकि न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा मेडिकल अवकाश पर थीं. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 सितंबर को अपने निर्णय में सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दे दी थी. मगर कोर्ट फैसले के बावजूद श्रद्धालुओं के भारी विरोध-प्रदर्शन के चलते 31 दिसंबर, 2018 तक कोई भी महिला सबरीमाला मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकी थी. लेकिन बीते 2 जनवरी को 40 वर्ष से ज्यादा उम्र की दो महिलाएं सबको चकमा देकर मंदिर में प्रवेश करने में कामयाब रही थीं. बिंदु और कनकदुर्गा नाम की इन दो महिलाओं ने उस दिन सुबह 3 बजकर 45 मिनट पर मंदिर में प्रवेश कर गर्भगृह के दर्शन किया था. इस दौरान सादे कपड़ों में पुलिस इन्हें सुरक्षा दे रही थी. सैकड़ों साल पुराने भगवान अयप्पा के इस मंदिर में 10 वर्ष से लेकर 50 वर्ष उम्र तक की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. यह परंपरा प्राचीण समय से चली आ रही है.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2GejePo

बापू के पोस्टर पर गोली चलाने की मिली हिंदू महासभा को सजा, वेबसाइट हुई हैक

बापू के पोस्टर पर गोली चलाने की मिली हिंदू महासभा को सजा, वेबसाइट हुई हैक
हिंदुत्ववादी संगठन अखिल भारतीय हिंदू महासभा की आधिकारिक वेबसाइट को गुरुवार को हैक हो गई. बुधवार को इस संगठन की ओर से महात्मा गांधी की हत्या की घटना को दोबारा जीवंत करने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद टीम केरला साइबर वॉरियर्स की ओर से इस वेबसाइट को हैक कर लिया गया. वेबसाइट के एड्रेस http://www.abhm.org.in/ पर जाने पर जो पेज खुल रहा है, उसपर इस हैकिंग टीम की ओर से इस मामले के आरोपियों पर राष्ट्रदोह का केस चलाने की मांग की गई है. साथ ही पेज पर हिंदू महासभा मुर्दाबाद भी लिखा हुआ है. बता दें कि बुधवार को महात्मा गांधी की 71वीं पुण्यतिथि पर हिंदू महासभा के कुछ सदस्यों का एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें संगठन की राष्ट्रीय सचिव डॉ. पूजा शकुन पांडेय महात्मा गांधी के एक पोस्टर पर एयर पिस्टल से गोली चला रही थीं और पीछे खड़े कुछ लोग नाथूराम गोडसे की जय-जयकार कर रहे थे. इस मामले में अलीगढ़ में पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है. ये वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस तुरंत महासभा के कार्यालय पहुंची और वहां मौजूद दो सदस्यों को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने पूजा और चार अज्ञात लोगों सहित नौ लोगों के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज किया गया. इस घटना पर विरोध दर्ज कराने के लिए टीम केरला साइबर वॉरियर्स की ओर से संगठन की वेबसाइट गुरुवार को हैक कर ली गई. हैकरों की ओर से लिखा गया, 'गांधी जी वैश्विक स्तर पर अहिंसा और सही पथ पर चलने के लिए लोगों के प्रेरणा के स्रोत रहे हैं.' इसके साथ ही ये भी लिखा गया कि इन सभी लोगों पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए, 'arrest this hippopotamus and her goons under sedition charge as soon as possible'. इसके अलावा पूजा के लिए खासकर एक मैसेज लिखा गया, 'Lose your weight instead of losing your brain b****'. वैसे बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है, जब इस हैकिंग टीम ने हिंदू महासभा की वेबसाइट हैक की हो. इसके पहले केरल में जब बाढ़ आई थी तो हिंदू महासभा के प्रमुख स्वामी चक्रपाणि ने बयान दिया था कि बाढ़ में बस उनकी मदद की जानी चाहिए, जो लोग बीफ नहीं खाते हैं, इसके बाद इस पर विरोध जताने के लिए हैकर्स ने वेबसाइट हैक कर ली थी.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2RtQu70

परीक्षा से पहले होती है टेंशन? अब ये टिप्स दूर करेंगे आपकी परेशानी और बढ़ाएंगे आत्मविश्वास

परीक्षा से पहले होती है टेंशन? अब ये टिप्स दूर करेंगे आपकी परेशानी और बढ़ाएंगे आत्मविश्वास
माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडियट की परीक्षाएं आगामी 7 फरवरी से शुरू होंगी. हाईस्कूल की परीक्षाएं 28 फरवरी को और इंटरमीडियट की परीक्षाएं 2 मार्च को सम्पन्न होंगी. कुल 58,06,922 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे. परीक्षाओं को लेकर बच्चों के मन में बहुत टेंशन जमा होती है. उन्हें समझ में नहीं आता कि क्या करें और क्या न करें. एग्जाम देने से थोड़ी देर पहले तक भी बच्चों के दिल की धड़कने तेजी से धड़कती रहती हैं. ऐसे में इस टेंशन को दूर करना बहुत जरूरी हो जाता है क्योंकि इसका बुरा असर उनकी परीक्षा पर भी पड़ सकता है. सरल प्रश्न भी उस वक्त कठिन लगने लगते हैं, आइए आपको बताते हैं इस टेंशन को दूर करने के कुछ सरल उपाएं- अपनी पसंद या शौक का कोई भी छोटा-मोटा काम कर सकते हैं परीक्षार्थियों के लिए जरूरी है कि परीक्षा देने से पहले दिल और दिमाग दोनों शांत रहें. इसके लिए खुश रहना जरूरी है. एग्जाम से पहले ऐसा कोई काम जरूर करें जो आपको खुशी दे. आप अपनी पसंद या शौक का कोई भी छोटा-मोटा काम कर सकते हैं. उदाहरण के लिए अगर आपको गाने सुनना पसंद है तो आप सुबह उठकर धीमी आवाज में कुछ देर तक गाने सुन सकते हैं. हालांकि ये ज्यादा मात्रा में न हो सिर्फ उतना ही जितना आपका मन शांत हो सके. अगर मन खुश होता है तो कठिन चीज भी सरल लगने लगती है. ऐसा खाना खाएं जो आपको पसंद हो एग्जाम से पहले कुछ ऐसा खाना खाएं जो आपको पसंद हो. जिसे देखकर आपके दिल में खुशी होती हो. आपको बता दें कि ऐसा करने से एग्जाम से पहले होने वाली टेंशन दूर होती है. आपका दिल खुश होता है और सबकुछ सही लगने लगता है. वैसे आपको बता दें कि परीक्षा देने से पहले ड्राइफ्रूट्स खाने से भी दिमाग की मांसपेशियों को आराम मिलता है और इससे दिमाग पर ज्यादा प्रेशर नहीं बनता. परीक्षा से पहले के समय में दिमाग से प्रेशर हटाना बहुत जरूरी है. नींद से जागकर थोड़ा मेडिटेशन जरूर करें एग्जाम के दिन सुबह नींद से जागकर थोड़ा मेडिटेशन जरूर करें. मेडिटेशन करने से दिमाग शांत रहता है. बाहरी कोई प्रेशर दिमाग को परेशान नहीं करता. मेडिटेशन करने से एग्जाम से थोड़ी देर पहले की टेंशन से निजात पाया जा सकता है. आपको बता दें कि एग्जाम से थोड़ी देर पहले का समय काफी उथल-पुथल भरा होता है. परीक्षार्थियों के दिमाग में सिलेबस और प्रश्नपत्र को लेकर हलचल मचती रहती है. ऐसे में इस हलचल को दूर करना जरूरी हो जाता है. मेडिटेशन इसके लिए एक आसान उपाय है. परीक्षा से पहले का समय केवल रिवीजन में बिताएं ज्यादातर परीक्षार्थी एग्जाम से थोड़ी देर पहले तक भी किताबों और सिलेबस में व्यस्त रहते हैं लेकिन ऐसा करना बिल्कुल सही नहीं है. आखिरी वक्त की जल्दबाजी वाली तैयारी आपको परेशान कर सकती है. कई आसान चीजों को भुला भी सकती है. इसलिए परीक्षा से पहले का समय केवल रिवीजन में बिताएं. केवल उन्हीं चीजों के बारे में सोचे जो आपको पता हो. जिसे दोबारा सोचकर आपका आत्मविश्वास मजबूत हो. आपका हौंसला बढ़े ताकि आप आसानी से प्रश्नपत्र को हल कर सकें. परीक्षा के पहले के समय में पढ़ाई करना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है इन टिप्स को अपनाना.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2UtsLG0

केरल बजट: फिल्म देखना, बीयर-वाइन पीना महंगा, 'बाढ़ सेस' फंड जुटाने का इंतजाम

केरल बजट: फिल्म देखना, बीयर-वाइन पीना महंगा, 'बाढ़ सेस' फंड जुटाने का इंतजाम
केरल सरकार ने आज अपना बजट पेश किया. पिछले साल केरल को बाढ़ की वजह से काफी नुकसान उठाना पड़ा था. बाढ़ की त्रासदी से निपटने के बाद राज्य को दोबारा पटरी पर लाने के लिए सरकार को फंड की जरूरत थी और इसका इंतजाम बजट से किया गया. क्या हुआ महंगा? केरल सरकार ने फिस्कल ईयर 2019-20 का बजट पेश करते हुए एंटरटेनमेंट को महंगा किया है. इसके तहत सिनेमा टिकट, बीयर और वाइन के दाम बढ़ाने का फैसला किया गया है. इसके अलावा 'बाढ़ सेस' भी लगाया गया है. केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (MCP) के नेतृत्व वाली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने बाढ़ के गुरुवार को अपना पहला बजट पेश किया. इस दौरान, पिनराई विजयन के फाइनेंस मिनिस्टर वित्त मंत्री टीएम थॉमस इजाक ने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य को बढ़ाया है. उन्होंने कहा कि पिछले साल बाढ़ में तबाह हुए केरल के पुनर्निर्माण के लिए 25 नई परियोजनाओं का प्रस्ताव किया गया है. इसाक ने कहा, 'यह बजट नए केरल के निर्माण के लिए है.' 'केरल पुनर्निर्माण' पहल के लिए 1,000 करोड़ रुपए रखे गए हैं. उन्होंने कहा कि अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए सोना, चांदी और प्लैटिनम की ज्वैलरी सहित पांचवीं अनुसूची में आने वाले सभी उत्पादों पर 0.25 फीसदी का 'बाढ़ सेस' लगाया जाएगा. जीएसटी कर व्यवस्था के तहत 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत के दायरे में आने वाली सभी वस्तुओं और सभी सेवाओं पर एक प्रतिशत की दर से बाढ़ उपकर लगाया जाएगा. इसाक ने कहा कि यह उपकर दो साल के लिए होगा. इस कदम से हर साल 600 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा. बजट में बियर, वाइन समेत सभी तरह की विदेशी शराबों की पहली बिक्री पर कर की दर में दो प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव किया गया. इससे 180 करोड़ रुपए जुटाने की उम्मीद है. इसके अलावा सिनेमा देखना भी महंगा होगा. बजट में स्थानीय निकायों को फिल्म टिकटों पर 10 प्रतिशत का 'मनोरंजन कर' लगाने की मंजूरी दी गई है. इसाक ने कहा कि जीएसटी परिषद की सिफारिश के मुताबिक, सिनेमा टिकटों पर शुल्क को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है. हालांकि, राज्य सरकार ने इस पर स्थानीय निकाय को 10 प्रतिशत अतिरिक्त मनोरंजन कर लगाने की अनुमति दी है. केरल सरकार ने बजट में नई मोटरसाइकिलों, कारों और निजी उद्देश्य के लिए उपयोग होने वाले निजी सेवा वाहनों पर एक प्रतिशत का शुल्क लगाया है. इससे 200 करोड़ रुपए अतिरिक्त राजस्व जुटाने में मदद मिलेगी. आवासीय इमारतों के लिए विलासिता कर की दरों में भी संशोधन का प्रस्ताव है. लाखों लाभार्थियों को फायदा देते हुए सभी कल्याणकारी पेंशनों में 100 रुपए की बढ़ोतरी की गई है. इसाक ने कहा कि कुल बजट खर्च 1.42 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2Bc03Ci

Thursday, January 31, 2019

2008 असम सीरियल ब्लास्ट: NDFB प्रमुख, 9 आरोपियों को उम्र कैद

2008 असम सीरियल ब्लास्ट: NDFB प्रमुख, 9 आरोपियों को उम्र कैद
सीबीआई की एक विशेष अदालत ने असम में 2008 में हुए सिलसिलेवार धमाकों के मामले में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के प्रमुख सहित दस दोषियों का बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनाई. इन विस्फोटों में 88 लोग मारे गए थे. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अपरेश चक्रवर्ती ने कड़ी सुरक्षा के बीच दायमारी, जॉर्ज बोडो, बी थरई, राजू सरकार, अंचई बोडो, इन्द्र ब्रह्मा, लोको बासुमतारी, खरगेश्वर बासुमतारी, अजय बासुमतारी और राजन गोयारी को सजा सुनाई. अदालत ने तीन अन्य दोषियों- प्रभात बोडो, जयंती बसुमतारी और मथुरा ब्रह्मा- पर जुर्माना लगाया है. जुर्माने की राशि का भुगतान करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा. सीबीआई अदालत ने निलिम दायमारी और मृदुल गोयारी की रिहाई के आदेश भी दिए क्योंकि वे पहले ही अपनी सजा काट चुके हैं. दायमारी और 14 अन्य आरोपियों को सोमवार को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था. दोषी ठहराए जाने के तुरंत बाद एनडीएफबी प्रमुख की जमानत रद्द कर उसे हिरासत में ले लिया गया था जबकि 14 अन्य अभियुक्त पहले से ही न्यायिक हिरासत में थे. गौरतलब है कि एनडीएफबी ने 30 अक्टूबर, 2008 को गुवाहाटी तथा कोकराझार में तीन-तीन, बारपेटा में दो और बोंगईगांव में एक विस्फोट किया था. इन विस्फोट में 88 लोग मारे गए थे जबकि अन्य 540 लोग घायल हो गए थे.

from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2Be0dcl