Tuesday, February 19, 2019

डियर जिंदगी: बच्‍चे को 'न' कहना!

डियर जिंदगी: बच्‍चे को 'न' कहना!
बच्‍चे जितने प्रेम, स्‍नेह से न सुनेंगे. उसे ग्रहण करेंगे, जीवन में संघर्ष की धूप का सामना भी उतनी ही आसानी से कर पाएंगे.

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डियर जिंदगी: प्रेम दृष्टिकोण है…

डियर जिंदगी: प्रेम दृष्टिकोण है…
हम अपने जीवन को सुखद, सरल, सरस बनाना चाहते हैं, तो प्रेम को अपना स्‍वभाव बनाना होगा. उसको दूसरों के नजरिए, स्‍वभाव के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता!

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डियर जिंदगी: बच्‍चों के बिना घर!

डियर जिंदगी: बच्‍चों के बिना घर!
बच्‍चों के पढ़ाई के लिए बाहर जाते ही माता-पिता में खालीपन देखा जा रहा है. जैसे किसी ने उनकी मुस्‍कान गिरवी रख दी हो कि खुश रहना मना है.

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प्रेम और प्रेम दिवस!

प्रेम और प्रेम दिवस!
आज के लोग कहते पाए जाते हैं कि तबके प्रेमियों में साहस नहीं होता था. बेशक Kiss और Hug का साहस नहीं होता था क्योंकि प्रेमिका के लिए दिल में सम्मान होता था.

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डियर जिंदगी: रास्‍ता बुनना!

डियर जिंदगी: रास्‍ता बुनना!
जिंदगी के प्रति थोड़ी कंजूसी भी जरूरी है, जिससे इसे दूसरों से नफरत, असहमति के नाम पर खर्च होने से बचाया जा सके!

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Saturday, February 16, 2019

आखिर किसने छीन लिया है घरेलू क्रिकेट का सुख-चैन

आखिर किसने छीन लिया है घरेलू क्रिकेट का सुख-चैन
जिस देश का घरेलू क्रिकेट लोकप्रियता के मामले में बेहाल हो रहा हो, उस देश का क्रिकेट आगे जाकर नीचे जरूर गिरेगा.

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डियर जिंदगी: ‘ कड़वे ’ की याद!

डियर जिंदगी: ‘ कड़वे ’ की याद!
हम अपनी बहुत ‘छोटी’ दुनिया के अनुभव को जब बहुत बड़ी धरती पर लागू करने की कोशिश करते हैं, तो इससे हमारा दृष्टिकोण बहुत बाधित होता जाता है.

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डियर जिंदगी: अरे! कितने बदल गए...

डियर जिंदगी: अरे! कितने बदल गए...
बच्‍चे बहुत तेज़ी से सीखते, समझते और नई चीज़ के लिए तैयार होते हैं. विडंबना यह है कि बड़े होते ही हम अपना ही सबसे अनमोल गुण बिसरा देते हैं.

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डियर जिंदगी: सबकुछ ठीक होना!

डियर जिंदगी: सबकुछ ठीक होना!
संदेह, प्रेम की कमी से हम रिक्‍त, रूखे और कठोर होते जाते हैं. धीरे-धीरे यह हमारा स्‍थाई बनता जाता है. चित्‍त में जो भाव ठहर जाए, वह आसानी से नहीं बदलता.

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जेल में जफर: जिसे न जमीन मिली, न कलम

जेल में जफर: जिसे न जमीन मिली, न कलम
रंगून में अंग्रेजों की कैद में रहते हुए उन्होंने ढेरों गजलें लिखीं. बतौर कैदी अंग्रेजों ने उन्हें कागज-कलम तक मुहैया नहीं की थी. तब यह क्रांतिकारी शासक कोयले और जली हुई तीलियों से जेल की दीवारों पर गजलें लिखने लगा. दीवार पर लिखी गई उनकी यह मशहूर गजल आज भी खूब याद की जाती है और जिंदगी की हकीकत के करीब है.

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Tuesday, February 12, 2019

MamataVsCBI: दीदीगिरी और पुलि‍स की वर्दी पर दाग

MamataVsCBI: दीदीगिरी और पुलि‍स की वर्दी पर दाग
केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के पुलिस अधिकारियों की अनुशासनहीनता पर राज्यपाल के मार्फत गोपनीय रिपोर्ट मंगवाई है. सवाल यह है कि पश्‍च‍िम बंगाल की शेरनी ममता बनर्जी की दादागिरी, पुलिस अधिकारियों के सहयोग के बगैर कैसे चल सकती है?

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Tuesday, February 5, 2019

डियर जिंदगी: परिवर्तन से प्रेम!

डियर जिंदगी: परिवर्तन से प्रेम!
बाहरी नहीं, भीतरी चुनौती हमें अक्‍सर डराती है. यह अपनों से ही मिलती है. ऐसे में सबसे जरूरी इरादों पर डटे रहना, हार नहीं मानना है. सपनों, परिवर्तन के प्रति आस्‍था ही असली पूंजी है!

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किस्सा-ए-कंज्यूमर : ऑनलाइन कंपनी से आपको मिला है रिफंड?

किस्सा-ए-कंज्यूमर : ऑनलाइन कंपनी से आपको मिला है रिफंड?
क्या होता है जब आप घर आया डिलिवरी पैकेट खोलें और निकले टूटा फूटा या डिफेक्टिव माल? क्या ई-कॉमर्स कंपनी वो सामान बिना टाल-मटोल के वापस ले लेती है? क्या आपको आपके पैसे आराम से वापस मिल जाते हैं? 

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डियर जिंदगी : रिटायरमेंट और अकेलापन!

डियर जिंदगी : रिटायरमेंट और अकेलापन!
आगरा, उत्‍तरप्रदेश से ‘डियर जिंदगी’ के बुजुर्ग ने भावुक अनुभव साझा किया है. इस संदेश में सवाल, सरोकार, चिंता के साथ अकेलेपन की पीड़ा शामिल है. सुरेश कुलश्रेष्‍ठ का अनुरोध है कि इसे इनके नाम, परिचय के साथ प्रकाशित किया जाए. सुरेश जी चाहते हैं कि जो उनके साथ हुआ उनके किसी हमउम्र के साथ न हो!

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Sunday, February 3, 2019

टीम इंडिया विश्व कप जीतने की सबसे बड़ी दावेदार, उसे हराना टेढ़ी खीर होगी

टीम इंडिया विश्व कप जीतने की सबसे बड़ी दावेदार, उसे हराना टेढ़ी खीर होगी
भारत ने 2018-19 में दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया और अब न्यूजीलैंड को मात दी है. 

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स्वच्छता के बिना सम्मान नहीं पाया जा सकता

स्वच्छता के बिना सम्मान नहीं पाया जा सकता
हमारी स्वच्छता हमारे स्वयं के, हमारे वंश के, हमारी जाति के, हमारे धर्म के और हमारे देश के सम्मान के लिए बेहद जरूरी है. स्वच्छता जीवन का एक अनिवार्य विषय है. इसे वैकल्पिक मानकर अपना सम्मान ना गवाएं.

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बजट की व्याख्या अर्थशास्त्रियों को नहीं, नेताओं को करनी है

बजट की व्याख्या अर्थशास्त्रियों को नहीं, नेताओं को करनी है
बजट अभी पेश हुआ ही है. विद्वान लोग धीरे-धीरे इसकी खूबियां और खामियां रेशा-रेशा कर सामने लाएंगे. इन जानकारों में से ज्यादातर ऐसे होंगे जिन्होंने निष्कर्ष पहले से निकाल रखे होंगे, भले ही बजट कैसा भी हो.

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डियर जिंदगी: फैसला कौन करेगा!

डियर जिंदगी: फैसला कौन करेगा!
इस बात को गंभीरता से समझने की जरूरत है कि जीवन किसका है. इस पर किसका अधिकार है! सपने किसके हैं, दायित्व किसका है और अंततः जिम्मेदारी किसकी!

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डियर जिंदगी: रेगिस्तान होने से बचना!

डियर जिंदगी: रेगिस्तान होने से बचना!
शहर में हमारे घर आंगन एक दूसरे से इतने अलग और बंटे हुए हैं कि कब वहां सुख और दुख 'हमारे' ना होकर 'मेरे और तुम्हारे' में बदल जाते हैं, हम नहीं समझ पाते.  

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पद्मश्री बाबूलाल दाहिया : देसी अन्नों का देहाती विश्वामित्र

पद्मश्री बाबूलाल दाहिया : देसी अन्नों का देहाती विश्वामित्र
दाहिया जी को यह सम्मान पारंपरिक बीजों के संरक्षण और उनकी खेती के विस्तार को प्रोत्साहन देने के लिए मिला है. वे पिछले पंद्रह सालों से देसी बीजों की तलाश में पूरा देश घूम चुके हैं. बाबूलाल एक साथ दस काम ओढ़े हुए चलते हैं.

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